Sahar

यूं हुआ कि फिर वो बात उम्र भर ना हुई।
हुई जो रात तो फिर रात की सहर ना हुई।

तुम्हारे करम के क़िस्से हैं हर तरफ़ फैले,
ये और बात है हम पर कभी मेहर ना हुई।

हुआ यूं नीमनूर अपनी तमन्ना का चिराग़,
अंधेरी रात में भी ख़्वाहिश-ए-क़मर ना हुई।

मरहम-ए-वक़्त वहम है देखो वक़्त के साथ,
हमारी हालत तो बदतर हुई, बेहतर ना हुई।

तुमसे मिलकर जैसे बेसाख़्ता आई थी ख़ुशी,
फिर और किसी से कभी मिलकर ना हुई।

तुमने छोड़ा तो घटाओं ने बहुत साथ दिया,
ऐसी बरसात किसी से भी बिछड़कर ना हुई।

हमारी दरकिनार हो गईं दुआएं सब
तुम्हारी बद्दुआ ही थी जो बेअसर ना हुई।

तेरी नज़र कभी शबनम तो कभी शोला है
नसीब मेरे ग़ज़ल को सही बहर ना हुई।

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Unfulfilled

आइने टूटे थे जो उस रात तब ना जाने कब
मेरे पांवों में चुभ गया था टुकड़ा शीशे का
फिर मेरे कदम जहाँ पड़े, मैं लिखता गया
अपने ज़ख्मों की कहानी लहू से अपनी ही
नामुकम्मल है अभी भी वो किताब मेरी
जिसमें एक सफ़ा है वफ़ा के नाम से भी
ज़िक्र उसमें तुम्हारा है और मेरा भी
उस पे चस्पां है शीशे का वो टुकड़ा भी
तुम्हारा अक्स जिसमें अब तक है!

जफ़ा तो जब हो कि वफ़ा भी हो,
बिछड़े वो तब, जब मिला भी हो
तन मिले थे, मन मिले थे क्या
मन मिले थे तो फिर गिले क्यों हैं
अलग हुईं थी राहें या हमने कर डालीं
इस बात पर बहस-मुबाहिसा करो ना करो
राह हसीन है मगर मंज़िल को नहीं जाती है,
अगर मंज़िल को है तो रस्ता हसीन हो या ना हो!

तुम्हारे ख़्वाब के ताबीर भी अधूरे हैं
मेरा भी ताजमहल हो सका तामीर नहीं
कहाँ का शाह-ए-जहाँ, देख पैरहन मेरा
एक इबारत सी लिख रखी है पैबन्दों ने
बीते हुए लम्हों की जबानी जिसमें
अफ़सुर्दा रातों के कितने स्याह किस्से हैं
इस इन्तज़ार में कि तुम आओगे, सुनोगे कभी
इस ऐतबार से कि तुम ही समझ पाओगे!

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Triveni & a postscript

हर एक बात मेरी जिंदगी की तुमसे है ہر ایک بات میری زندگی کی تمسے ہے
वो एक रात मेरी ज़िंदगी की तुमसे है وو ایک رات میری زندگی کی تمسے ہے
बाकी सब दिन तो इंतज़ार के थे باکی سب دیں تو انتظار کے تھے

अब कोई रास्ता बचा ही नहीं اب کوئی راستہ بچا ہی نہیں
जिधर देखो बस पानी ही पानी جدھر دیکھو بس پانی ہی پانی
इस तलातुम में खुदा क्या नाखुदा भी नहीं  اس تلاطم میں خدا کیا ناخدا بھی نہیں

तुम थे तो चट्टानों से भी लड़ जाता था تم تھے تو چٹانوں سے بھی لڈ جاتا تھا
तुम थे तो तूफानों से भी लड़ जाता था تم تھے تو طوفانوں سے بھی لڈ جاتا تھا
आज खुद से भी सामना नहीं होता آج خود سے بھی سامنا نہیں ہوتا

फिर वही रात तो आने से रही پھر وہی رات تو آنے سے رہی
लगी ये आँख ज़माने से रही لگی یہ آنکھ زمانے سے رہی
शमा बुझा दो, हमको अब सो जाने दो شمع بجھا دو ، ہمکو ہی اب سو جانے دو

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अमेरिका में बवंडर आया तो बिजली चली गई, امریکا میں بونڈرآیا تو بجلی چلی گی
हमारे गाँव में बिजली आये तो बवंडर आ जाए! ہمارے گانوں میں بجلی ے تو بونڈرآ جاے