Sufferings

वो अरसे से हमपे तंतर, मन्तर कर रहे हैं,
अब जाके सारे जन्तर असर कर रहे हैं!

और क्या गुज़रेगी, और क्या गुज़रना बाक़ी है?
जब तक गुज़र रही है गुज़र कर रहे हैं!

शमा की दार पर चढ़ बोला था वो परवाना!
शब-ए-ग़म जाओ, हम एलान-ए-सहर कर रहे हैं,

फिर तेरी याद की आवाज़ से गूंजा है खंडहर,
तुम्हारे बाद के सन्नाटे जहाँ घर कर रहे हैं!

ऐसा रहना भी क्या रहना जहाँ रहने वाले,
या तो मर कर रहे हैं, या डर कर रहे हैं!

बड़े रंगरेज़ थे, चले गए जो अँगरेज़ थे,
ऐसे रंगे हम कि हर को सर-सर कर रहे हैं!

मता-ए-दिल  राहजन की नज़र कर रहे हैं,
ये कैसा सफ़र हम ऐ हमसफ़र कर रहे हैं,

नुक्ता दोनों का सही और मतलब अलग अलग,
तुम सफ़र कर रहे हो, हम सफ़र कर रहे हैं!

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