Red Bull

रात भर उड़ते रहे यूं मेरे ख्वाब के पर
मुझको भी लग गए हैं सुर्खाब के पर

अपनी रानाई पे गुरूर अच्छा है मगर,
तुमने देखे ही कहाँ हैं उस अजाब के पर

तेरे आरिज़ को यूं छूते हैं गेसू तेरे
समन को छू रहे हों जैसे गुलाब के पर

सुकून-ए-शब है, चांदनी खिली है अभी,
बस थोड़ी देर में लग जाएंगे महताब के पर

झपट्टे मारते चीलों में फँस गया खरगोश,
जंगल से शहर तक फैले हैं तेजाब के पर

हमें पता था सवाल उठाएगा मुझपे वो ही,
के जिसने काट दिए थे मेरे जवाब के पर

 

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