No Answers

मेरी जिंदगी इक खुली किताब है लेकिन,
तेरे सवालों का इसमें कोई जवाब नहीं!

मैं जानता हूँ दर्द का मतलब,
हुआ मेरे भी साथ है वही सब,
मगर मेरा ये दर्द मेरा है,
यही इक दर्द है जीने का सबब,
और मर भी जाऊं तो कुछ खराब नहीं!

मेरी जिंदगी इक खुली किताब है लेकिन,
तेरे सवालों का इसमें कोई जवाब नहीं!

तुम्हारे अरमां जहाँ पे क़त्ल हुए,
उसी मकतल में खून मेरा बहा,
वहाँ उस जश्न में सबने देखा,
मगर है कोई जिसने कुछ भी कहा,
तुम्हारा क्या कहूँ मेरा ही कुछ हिसाब नहीं!

मेरी जिंदगी इक खुली किताब है लेकिन,
तेरे सवालों का इसमें कोई जवाब नहीं!

बादे-मर्ग, अब बची है बस एक आरज़ू,
कि जिस तरह बहा है वहाँ मेरा लहू,
वैसे ही किसी और को मरना नहीं पड़े,
ना मुसलसल चले इश्क-ए-दार की ये खू,
मैं तो चुना गया था, ये मेरा इंतखाब नहीं!

मेरी जिंदगी इक खुली किताब है लेकिन,
तेरे सवालों का इसमें कोई जवाब नहीं!

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Cool Quotient

(Thanks to long days and no time to think in the last two days, here’s note from last year discovered yesterday. Do react!)

उठो, बाँहें चढ़ाओ,
उफनते हुए सागर के
सीने पे चढ़ जाओ
मत सोचो लहरों की दिशा
अनुकूल है या प्रतिकूल है
अपने बाजू पर भरोसा,
हस्ब-ए-मामूल है तो सब कूल है!

तेरे नख्ली ज़मीं पे ए बागबां,
जो पसीने से सिंचा इक झाड़ है
उसे गले लगा के मुस्कुरा,
चाहे फूल है या शूल है
स्वेद-सिंचित सत्य है,
ये मूल है तो सब कूल है!

एक ही जीवन है, लुट गया,
लुटा दिया,
या फिर यूं ही बिता दिया,
अगली बार बेहतर करेंगे
ये सोचना भी भूल है
पुनर्जनम झूठ है,
ये सच जो मालूम है तो सब कूल है!

कर्म का कोई अर्थ,
कोई उद्देश्य हो, हे पार्थसारथी!
अगर मा फलेषु कदाचन,
तो कर्मण्ये वाधिकारस्ते फ़िज़ूल है,
हाँ दूसरों के फल का लालच नहीं,
ये अगर उसूल है तो सब कूल है

उनकी मूरत हृदय में हो,
सो हृदय ही पत्थर बना लिया,
अब धड़कता नहीं, निर्जीव है, निर्मूल है,
परस्तिश की कसरत करता हूँ,
पत्थर को पसीना आता रहे,
यही पूजा का फूल है, तो सब कूल है!