Che Ganwara!

आस के बंधन टूट गए हैं
बालम मो से रूठ गए हैं।

भगवा तन और मन अंगरेज
कौन सो रंग दियो रंगरेज
बीतो बरस अब, कछु नहीं सरस अब
नर के इंद्र भी दिखैं अबस अब
जड़-चेतन में सगरे जगत में
का देखौ तुम अपने भगत में
काहै चेहरा मोड़ लिए हौ
हमसे रिश्ता तोड़ लिए हौ।

कितनी गाथा हमने बांची
आधी झूठी आधी सांची
तुम को पालन हार बताके
जीवन का सब सार बताके
कहो विकास कहां है किधर है
वही तमाशा उधर इधर है
कागद कारे कर कर हारे
तुम ही हमको भूले बिसारे।

रुसवाई का कारण का है
जगहंसाई बेकारण का है
हमरी अरज तुम्हरी भी होती
हमरी गरज हमरी ही क्यों है
भागत-भगत कहां आ पहुंचे
तुम्हरे जगत में हम ना पहुंचे
सपन सलोना कोना कोना
हमरे माथे लिखा था रोना

आस के बंधन टूट गए हैं
बालम मो से रूठ गए हैं।

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साल मुबारक

साल बदला है तो आपको हो साल मुबारक,
हाल बदला नहीं फिर भी बहरहाल मुबारक!
बीता जो साल आपको सालेगा सालों तक,
आया जो साल उसकी नई चाल मुबारक!

आम आदमी को दिल्ली की कुर्सी है मिल गई,
राजनीति में आया जो वो भूचाल मुबारक!

सत्ता के गलियारों में ईमान है उग आया,
स्थाई तो नहीं है पर फिलहाल, मुबारक!

नेता जी की चमड़ी तो दमड़ी से अलग है,
जनताजी को ये मोटी होती खाल मुबारक!

तुम्हें अन्ना के दुधमुंहें सपनों की कसम है,
तगड़ा ना है, लंगड़ा है पर लोकपाल मुबारक!

एक बाबा के सपने ने हमरी नींद उड़ा दी,
खुदाई में जो मिला नहीं वो माल मुबारक!

शिकारी आएगा जाल बिछाएगा दाना डालेगा,
रट रट के जो फंसते हैं उन्हें जाल मुबारक!

रहने को तो हम साथ ही रहते थे, रहेंगे,
दरकार है हर पंछी को इक डाल मुबारक!

ठण्ड है प्रचंड और पीड़ित को मिले दंड,
इस कदर घमंड, भई, कमाल! मुबारक!

दिल तो मुज़फ्फरनगर का रिलीफ कैम्प है,
सुबह टूटेगा पर अभी शब-ए-विसाल मुबारक!

जो सैफई में सेफ है उस वोटबैंक की कसम,
बिलखते बच्चों कों आइटम-ए-पामाल मुबारक!

सावन के अंधों को हरित क्रान्ति से क्या,
ये पीला है, नीला है या है लाल, मुबारक!

जो दिखलाते रहते हैं हर इक को आइना,
उन आइनादारों को तेजपाल मुबारक!

अलाई खा गए मलाई और हम देखते रहे,
कांग्रेस को रह गया है बस मलाल मुबारक!

हेमा के गाल वाली सड़कों को दी उपमा,
बहुत बजाते हैं जो लोग उन्हें गाल मुबारक!

लायक नहीं हैं इसके पर अमला है, बंगला है,
गधों को मिल गया है जो घुड़साल मुबारक!

क्रिकेट का बुखार तो उतरेगा ना कभी,
इस साल वर्ल्ड कप है तो फ़ुटबाल मुबारक!

समानता उपलब्धता पर इस हद तक है निर्भर,
है घर की मुर्गियों को भी अब दाल मुबारक!

रूपए और डॉलर में क्यों बनती नहीं कभी,
हमको भी हो करेंसी में इक उछाल मुबारक!

वादों की लड़ी बन रही है पार्टी दफ्तर में,
गंजों को मिल सकते हैं कुछ बाल मुबारक!

चौदह में फैसला है इस पार कि उस पार,
तब तक आप सब को केजरीवाल मुबारक!

Irony Man

हे युग पुरुष, युग का अंत हुआ, सूरज के साथ कयाम करो,
जो जुग बीता उसे देखो मत, उगते सूरज को सलाम करो!

तुमको आपत्ति हुई नहीं, कभी लौह पुरुष कहलाने में,
गर्म रहोगे, चोट पड़ेगी, रीत यही है ज़माने में,
तुम बने बहुत कुछ, अब न बनो, बन में जाओ बिश्राम करो!

लोहा लोहे को काटता है, ये टुंडे ठाकुर कह के गए,
तुमसे पहले भी कितने कटे, टुंडे हुए औ रह के गए,
तुम लोहे के चने चबाओ, घर में रहो आराम करो!

लोहा फूलता-फलता है, जब तक चलता है, चलता है,
जंग में खून बहाता है, जंग खाता है, फिर गलता है,
गलता है सो गलत नहीं है, सही को ना बदनाम करो!

किस्मत कह लो लोहे की, इसके दो ठिकाने पुराने हैं,
कारखाने अयस्क गए औ वयस्क कबाड़खाने हैं,
दो खानों में खानाखराब तुम ना आखिरी जाम करो!

जब काम किया तब नाम किया, मौके पे जै श्री राम किया,
राम का नाम लो लाल मेरे, महफ़िल को राम राम करो!

Shikwa

वैसे तुम से है मुझे प्यार बहुत
मैं कुछ दिनों से हूँ बेज़ार बहुत

हुस्न ने जान की कीमत मांगी
महंगा है सच ये कारोबार बहुत

जिसको देखो तपा-तपा सा है
चढ़ा है इश्क का आज़ार बहुत

उनकी ज़ुल्फ़ों में कोई बात तो है
एक-एक ख़म में गिरफ़्तार बहुत

मेयार-ए-चश्म-ए-यार, क्या कहिए
मिकदार जो भी हो, खुमार बहुत

कमर में धार वो कि सीना चाक
दिल को सीने में भी अय्यार बहुत

रिबा-ए-दर्द का हिस्सा ना लिया
मियां तुम निकले ज़ियांकार बहुत

देख ली आपकी भी सरदारी
सर्द निकले मेरे सरकार बहुत

लहू से हाथ रंगे हैं जिस के
हर तरफ़ उसके तरफ़दार बहुत

ये सच नहीं कि ऐतबार नहीं
कर लिया हमने इंतज़ार बहुत

आँधियां ले गई सर से छत को
बारिशों के भी हैं आसार बहुत

बुलहवस बदमिज़ाज दुनिया में
आदमी हो गया लाचार बहुत

चमन समन हुआ बहार आई
आए खुशबू के खरीदार बहुत

गुलों से अपना खूं का रिश्ता है
खार क्यूँ खाएं जो हैं ख़ार बहुत

फिर वही मुश्किलें मुकाबिल हैं
अनार एक और बीमार बहुत

किस्सा-ए-दर्द मुख्तसर बेहतर
कौन सुनता हैं यहाँ यार बहुत