Don’t change. Let it be!

(With due apologies to Mamata & Manmohan!)

नए ज़माने, लोग पुराने, तल्खी वही पर तंज के माने,
बदले होंगे सब के लिए, उन्हें यूं ही हंसी में ना बदलो!!

आएगा इक दिन वो दिन कि दिन में भी कुछ दिखे नहीं,
आज की रौशन रात को हमदम, तीरगी में ना बदलो!!

सारे ख्वाब मुलायम थे, तुम थे तो हम भी कायम थे,
पेश-ए-तर्क-ए-तआल्लुक मेरे गम को खुशी में ना बदलो!!

तुम ने ही तो हमको चाहा, तुम ही तो ठुकराए गए,
वादा-ए-तजदीद-ए-वफ़ा से, हम को हमीं में ना बदलो!!

चुप रहने से हो सकता है लोग तुम्हें मूरख समझें,
खोल के अपनी शोख ज़बां, उस शक को यकीं में ना बदलो!

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