Marham

जब कोई भी नया ग़म मिला है, جب کوئی بھی نیا غم ملا ہے
मेरे ज़ख्मों को मरहम मिला है. میرے زخموں کو مرہم ملا ہے

यूं मिला तो बहुत कुछ बहुत है, یوں ملا تو بہت کچھ بہت ہے
जो कम था वही कम मिला है جو کم تھا وہی کم ملا ہے

तेरी लागर्ज़ी मर्ज़ी है तेरी تیری لاگرزی مرضی ہے تیری
मर्ज़ हमको भी बाहम मिला है  مرض ہمکو بھی باہم ملا ہے

बज़्म-ए-ग़ैरां है हैरां किस शै पर, بزم غیراں ہے حیراں کس شی پر
जब मिला हमको बरहम मिला है جب ملا ہمکو برہم ملا ہے

तेरी आँखों के पीछे जुबां है تیری آنکھوں کے پیچھے جباں ہے
बोलती हैं कोई पुरनम मिला है بولتی ہیں کوئی پرنم ملا ہے

शरबत-ए-हिन्द पूछो ना लज्ज़त  شربت ہند پوچھو نہ لذّت
गंगाजल में आब-ए-ज़मज़म मिला है گنگاجل میں اب زمزم ملا ہے

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Letters, Words & a Sentence

Life is not a word.
Life is a sentence.
Made of a four-letter word.
Like that.

Death is not a sentence.
Death is a word.
A five-letter word.
Like birth.

Pain is a four-letter word.
Like love. Or life.
Like like.
It’s here. To bear.

God is a three-letter word
Like Sun.
You too have three letters.
Like one.

You become U. To be equal to I.
But that is underspelling.
Truth is I am two letters short.
To become you.

One, two, six, and ten have three.
Three, seven, eight have five.
Nine and five have four.
They meet at four. Therefore.

Sahar

यूं हुआ कि फिर वो बात उम्र भर ना हुई।
हुई जो रात तो फिर रात की सहर ना हुई।

तुम्हारे करम के क़िस्से हैं हर तरफ़ फैले,
ये और बात है हम पर कभी मेहर ना हुई।

हुआ यूं नीमनूर अपनी तमन्ना का चिराग़,
अंधेरी रात में भी ख़्वाहिश-ए-क़मर ना हुई।

मरहम-ए-वक़्त वहम है देखो वक़्त के साथ,
हमारी हालत तो बदतर हुई, बेहतर ना हुई।

तुमसे मिलकर जैसे बेसाख़्ता आई थी ख़ुशी,
फिर और किसी से कभी मिलकर ना हुई।

तुमने छोड़ा तो घटाओं ने बहुत साथ दिया,
ऐसी बरसात किसी से भी बिछड़कर ना हुई।

हमारी दरकिनार हो गईं दुआएं सब
तुम्हारी बद्दुआ ही थी जो बेअसर ना हुई।

तेरी नज़र कभी शबनम तो कभी शोला है
नसीब मेरे ग़ज़ल को सही बहर ना हुई।

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Shikwa

वैसे तुम से है मुझे प्यार बहुत
मैं कुछ दिनों से हूँ बेज़ार बहुत

हुस्न ने जान की कीमत मांगी
महंगा है सच ये कारोबार बहुत

जिसको देखो तपा-तपा सा है
चढ़ा है इश्क का आज़ार बहुत

उनकी ज़ुल्फ़ों में कोई बात तो है
एक-एक ख़म में गिरफ़्तार बहुत

मेयार-ए-चश्म-ए-यार, क्या कहिए
मिकदार जो भी हो, खुमार बहुत

कमर में धार वो कि सीना चाक
दिल को सीने में भी अय्यार बहुत

रिबा-ए-दर्द का हिस्सा ना लिया
मियां तुम निकले ज़ियांकार बहुत

देख ली आपकी भी सरदारी
सर्द निकले मेरे सरकार बहुत

लहू से हाथ रंगे हैं जिस के
हर तरफ़ उसके तरफ़दार बहुत

ये सच नहीं कि ऐतबार नहीं
कर लिया हमने इंतज़ार बहुत

आँधियां ले गई सर से छत को
बारिशों के भी हैं आसार बहुत

बुलहवस बदमिज़ाज दुनिया में
आदमी हो गया लाचार बहुत

चमन समन हुआ बहार आई
आए खुशबू के खरीदार बहुत

गुलों से अपना खूं का रिश्ता है
खार क्यूँ खाएं जो हैं ख़ार बहुत

फिर वही मुश्किलें मुकाबिल हैं
अनार एक और बीमार बहुत

किस्सा-ए-दर्द मुख्तसर बेहतर
कौन सुनता हैं यहाँ यार बहुत

All that is you

नूर-ए-सुब्ह हो मेरे, सुकून-ए-शब हो तुम,
तुम्हें जिस रंग में देखूं गरां ग़ज़ब हो तुम।

मेरे सब ज़ख़्म तुम्हें हंस के दुआ देते हैं,
मेरी सब मुस्कुराहटों के भी सबब हो तुम।

गुलाब, ख़ार, दवा, दर्द, खिजां, अब्र-ए-बहार
मेहर हो, क़हर हो, शाम, सहर, सब हो तुम।

तुम्हारे दश्ते तलब में सराब झिलमिल हैं,
जैसा मैं हूँ क्या वैसे तश्नालब हो तुम?

पलकें जो बंद करूँ तुम ही नज़र आते हो,
मैं तुमसे दूर हूँ पर मुझसे दूर कब हो तुम?

मेरा वजूद है सुजूद तेरे सजदे में
आगे क्या कहूँ कह दिया कि रब हो तुम।

तर्क-ए-तआल्लुक़ का ख़याल अस्ल में तुम्हारा था,
अब तुम ही रोते हो, काकिसी अजब हो तुम!

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नूर-ए-सुब्ह: भोर की किरण | सुकून-ए-शब: रातों का सुकूं | गरां ग़ज़ब: बड़ी गज़ब | ख़ार: कांटे | खिजां: पतझड़ | अब्र: बादल  |

दश्ते तलब: चाह का रेगिस्तान | सराब: मृगमरीचिका | तश्नालब: प्यासा | सुजूद: सजदे की अवस्था | तर्क-ए-तआल्लुक़: रिश्ते तोड़ना

Collateral Damage

You infiltrate into my world
Sneak in
Under the cover of darkness
Into my heart
where it snows through the year
You fire your questions
I retaliate with mine
The innocent answers
Are taken hostage
In the battlefield
Mined with betrayals
Like bullets, accusations fly
And the answers die

I wish we could meet in sunshine
On a bright day, you can see
How much I have bled,
And I can see your face
And the wounds, the bitterness
that I have only a smell of
When we engage in the fiercest fight ever
To slay the past, at last
Your place or mine,
I wish we could bring in some sunshine
Because here, it snows through the year

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तुम दबे पाँव आते हो
अंधेरे की चादर में छिपते-छिपाते
घुसपैठ करने मेरे खाना-ए-दिल में
जहां बरस भर बर्फ़बारी का मौसम रहता है
सवालों की शक्ल में गोलियाँ बरसाते
सामना करता हूँ उनका सवालों से मैं
और हमारे निर्दोष जवाब
मूक बंधक बन जाते हैं
लड़ाई के इस मैदान में
यादों, वादों के बारूदी सुरंगों के बीच
आरोपों के कारतूस सांय-सांय, दाँए बाएँ
और सब जवाब वहीं ढेर हो जाते हैं

काश कभी होते आमने-सामने
दिन के उजाले में
सूरज की नर्म धूप के साए में
तुम देख पाते मेरे सदचाक बदन पर
सभी ज़ख़्मों के निशां
मैं देख पाता तुम्हारा चेहरा
और उस के पीछे का आदमी
और उसके पीछे के सब घाव
जिनका बस एहसास भर है मुझे
कि जिनको मैं जानता-पहचानता नहीं हूँ
फिर चाहे जान देते उस आख़री लड़ाई में
इतिहास को पराजित करने की
तुम्हारे आंगन में या मेरे सहन में, कहीं भी
बशर्ते कि दिन का उजाला हो
सूरज की नर्म धूप का साया हो
क्योंकि मैं जहाँ हूँ वहाँ
बरस भर बर्फ़बारी का मौसम रहता है।

Fear, Oh Dear!

मैं तो बस आप ही से डरता हूँ. میں تو بس آپ ہی سے ڈرتا ہوں
मैं कहाँ कब किसी से डरता हूँ. میں کہاں کب کسی سے ڈرتا ہوں

मेरी दुनिया है रोशनाई में, میری دنیا ہے روشنائی میں
इसलिए रौशनी से डरता हूँ. اسلئے روشنی سے ڈرتا ہوں

बहर-ए-आंसू हूँ बदौलत तेरी, بحرآنسو ہوں بدولت تیری
तेरी दरियादिली से डरता हूँ. تیری دریادلی سے ڈرتا ہوں

जब तेरा अक्स याद आता है, جب تیرا اقس یاد آتا ہے
मैं बहुत सादगी से डरता हूँ. میں بہت سادگی سے ڈرتا ہوں

रंज से इस कदर याराना हुआ, رنج سے اس کدر یارانہ ہوا
मिले तो अब खुशी से डरता हूँ. ملے تو اب خوشی سے ڈرتا ہوں

मौत से डर नहीं ज़रा भी मुझे, موت سے ڈر نہیں ذرا بھی مجھے
हाँ, इस जिंदगी से डरता हूँ. ہاں، اس زندگی سے ڈرتا ہوں

जाने पहचाने थे हाथ औ खंजर, جانے پہچانے تھے ہاتھ-او -خنجر
कहता था अजनबी से डरता हूँ! کہتا تھا اجنبی سے ڈرتا ہوں

वस्ल की बात पर ख़मोशी भली, وصل کی بات پر خموشی بھلی
हाँ से भी, और नहीं से डरता हूँ! ہاں سے بھی اور نہیں سے ڈرتا ہوں

वो इक रात की गफ़लत ही थी, وو اک رات کی گفلت ہی تھی
मैं क्यूँ फिर चांदनी से डरता हूँ! میں کیوں پھر چاندنی سے ڈرتا ہوں

ये क्या किया कि आसमां वाले, یہ کیہ کیا کے آسماں والے
मैं तुम्हारी ज़मीं से डरता हूँ! میں تمھاری جمیں سے ڈرتا ہوں

ग़म का बारूद छुपा सीने में, غم کا بارود چھپا سینے میں
फिर इक शोलाजबीं से डरता हूँ! پھر اک شولاجبیں سے ڈرتا ہوں

तेरे रुखसार पे एक नई गज़ल, تیرے رخسار پے ایک نی غزل
जो लिखी है उसी से डरता हूँ! جو لکھی ہے اسی سے ڈرتا ہوں

साँस गिनती की ही बची है मगर, سانس گنتی کی ہی بچی ہے مگر
घर में तेरी कमी से डरता हूँ. گھر میں تیری کمی سے ڈرتا ہوں

तुम्हारी याद के सहराओं में, تمہاری یاد کے صحراؤں میں
हर घड़ी तिश्नगी से डरता हूँ! ہر گھڑی تشنگی سے ڈرتا ہوں

दिल लगाने का शौक है तुमको, دل لگانے کا شوق ہے تمکو
और मैं दिल्लगी से डरता हूँ! اور میں دللگی سے ڈرتا ہوں

साक़िया चश्म-ए-करम कायम रख, ساقیا چشم کرم کیم رکھ
होश में भी तुम्हीं से डरता हूँ! ہوش میں بھی تمہیں سے ڈرتا ہوں

जब से सब हो गए ईमां वाले, جب سے سب ہو گے اماں والے
मैं हर एक आदमी से डरता हूँ. میں ہر ایک آدمی سے ڈرتا ہوں

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का किसी से कहें, काकिसि खुद ही, کا کسی سے کہیں کےککسی خود ہی
हूँ काकिसि और काकिसि से डरता हूँ! ہوں ککسی اور کاکسی سے ڈرتا ہوں

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नावेद अंजुम ने इस ग़ज़ल को दो और शेर बख्शे:

ये जो हैं अक्ल-ओ-खिर्द वाले नावेद, یہ جو ہیں عقل خرد والے نوید
उनकी तिश्नालबी से डरता हूँ. انکی تشنلابی سے ڈرتا ہوں

चारागर तूने वो खुशी दी है, چاراگر تونے وو خوشی دی ہے
अब मैं आज़ुर्दगी से डरता हूँ اب میں آزردگی سے ڈرتا ہوں

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रोशनाई: Darkness बहर: Ocean अक्स: Countenance रंज: Sorrow सहरा: Desert तिश्नगी: Thirst ईमां: faith काकिसि: तखल्लुस | کاکسی: تخللس Pen name
| खिर्द: Samajh | तिश्नालबी: parched lips | चारागर: Doctor | आज़ुर्दगी: being unwell

Cut it!

हमको तुमने दुश्मन जाना, छोड़ो यार!
तुमको कौनसा था याराना, छोड़ो यार!

हो सकता है होना ही इक सपना हो,
जो था वो था भी या था ना छोड़ो यार!

लाख कहा पर पाल लिया आस्तीनों में,
उन साँपों को दूध पिलाना छोड़ो यार!

किसने कहा था रह-ए-इश्क आसां होगी,
बीच रास्ते स्यापा पाना छोड़ो यार!

अहद-ए-मुहब्बत अहल-ए-वफ़ा की बाते हैं,
भैंस के आगे बीन बजाना छोड़ो यार!

खुद को तो तुम रत्ती भर ना बदल सके,
बदलेगा क्या खाक ज़माना, छोड़ो यार!

कतरे-कतरे से तुम हमरे वाकिफ़ हो,
महफ़िल में हमसे कतराना छोड़ो यार!

रौनक-ए-बज़्म-ए-रिन्दां थी चश्म-ए-साकी,
बिन उसके क्या है मयखाना, छोड़ो यार!

पैंसठ साल से राह तकत है इक बुढ़िया,
वादों से उसको बहलाना छोड़ो यार!

चाहें भी तो कैसे भूलें ज़ख़्म सभी,
तुम तो उनपर नमक लगाना छोड़ो यार!

आँख-लगे को रात जगाना छोड़ो यार,
सपनों में यूं आना जाना छोड़ो यार!

Triveni & a postscript

हर एक बात मेरी जिंदगी की तुमसे है ہر ایک بات میری زندگی کی تمسے ہے
वो एक रात मेरी ज़िंदगी की तुमसे है وو ایک رات میری زندگی کی تمسے ہے
बाकी सब दिन तो इंतज़ार के थे باکی سب دیں تو انتظار کے تھے

अब कोई रास्ता बचा ही नहीं اب کوئی راستہ بچا ہی نہیں
जिधर देखो बस पानी ही पानी جدھر دیکھو بس پانی ہی پانی
इस तलातुम में खुदा क्या नाखुदा भी नहीं  اس تلاطم میں خدا کیا ناخدا بھی نہیں

तुम थे तो चट्टानों से भी लड़ जाता था تم تھے تو چٹانوں سے بھی لڈ جاتا تھا
तुम थे तो तूफानों से भी लड़ जाता था تم تھے تو طوفانوں سے بھی لڈ جاتا تھا
आज खुद से भी सामना नहीं होता آج خود سے بھی سامنا نہیں ہوتا

फिर वही रात तो आने से रही پھر وہی رات تو آنے سے رہی
लगी ये आँख ज़माने से रही لگی یہ آنکھ زمانے سے رہی
शमा बुझा दो, हमको अब सो जाने दो شمع بجھا دو ، ہمکو ہی اب سو جانے دو

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अमेरिका में बवंडर आया तो बिजली चली गई, امریکا میں بونڈرآیا تو بجلی چلی گی
हमारे गाँव में बिजली आये तो बवंडर आ जाए! ہمارے گانوں میں بجلی ے تو بونڈرآ جاے

Whys of Whats

वो पूछते हैं कि क्यों चुप हूँ मैं, हुआ क्या है?
वजह गर जानता तो बता देता कि क्या क्या है!

तुम्हें गरज है फिर तर्क-ए-तआल्लुक ही सही,
हमें हरज है मगर इसमें हमारा क्या है?

वतन आज़ाद हुआ तो कौन सा आबाद हुआ,
वतन-परस्ती का आज़ादी से रिश्ता क्या है?

ख्वाम्खाह तोड़ गए सारे मरासिम हम से,
यही है रस्म तो फिर दिल का तोड़ना क्या है?

सुबह-ए-फिराक है जागें भी तो क्योंकर जागें
सोहबत-ए-शब की सिलवटों में रखा क्या है?

मैं तो इक रात को ताउम्र ओढ़े बैठा हूँ,
तुम्हारे चेहरे पे बरसों का ये पर्दा क्या है?

लगी जो आग तो सब जल गया बचा क्या है
अगर जिंदा है जुस्तजू तो फिर जला क्या है?