Marham

जब कोई भी नया ग़म मिला है, جب کوئی بھی نیا غم ملا ہے
मेरे ज़ख्मों को मरहम मिला है. میرے زخموں کو مرہم ملا ہے

यूं मिला तो बहुत कुछ बहुत है, یوں ملا تو بہت کچھ بہت ہے
जो कम था वही कम मिला है جو کم تھا وہی کم ملا ہے

तेरी लागर्ज़ी मर्ज़ी है तेरी تیری لاگرزی مرضی ہے تیری
मर्ज़ हमको भी बाहम मिला है  مرض ہمکو بھی باہم ملا ہے

बज़्म-ए-ग़ैरां है हैरां किस शै पर, بزم غیراں ہے حیراں کس شی پر
जब मिला हमको बरहम मिला है جب ملا ہمکو برہم ملا ہے

तेरी आँखों के पीछे जुबां है تیری آنکھوں کے پیچھے جباں ہے
बोलती हैं कोई पुरनम मिला है بولتی ہیں کوئی پرنم ملا ہے

शरबत-ए-हिन्द पूछो ना लज्ज़त  شربت ہند پوچھو نہ لذّت
गंगाजल में आब-ए-ज़मज़म मिला है گنگاجل میں اب زمزم ملا ہے

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A cat. And dogs. And gods.

1.

तुम्हें आना ही था, तुम आते ही
पर तुम आए तो बिन बताए आए
पूरी कोशिश की कि तुमसे पहले
तुम्हारी आहट ना पहुंचे हम तक
तुम्हारे तलवों में मखमल के गद्दे
दबा के रखते हैं आवाज़-ए-पा सब।
अलसाई भोर बालकनी में खड़ी
ओढ़े कोहरे की एक पतली चादर
तुमने कुछ कहा, शायद गुड मॉर्निंग
गुड मॉर्निंग टु यू टू
मेरे भी शब्द तुषार से निकले
तुम्हारे लफ़्ज़ों के गुबार से गले मिलने
हम कुहासे की भाषा में बात करने लगे!

2.

अब बताओ कहाँ बिताए दिन
और क्या रंगीन वहाँ रातें थीं
जहाँ घूमे ये नौ महीने तुम
जब हम ने प्यार में धोखा खाया
फरवरी की नर्माहट एक छलावा
कुछ दिनों में ही मई जून बना,
पालथी मार बैठ गया छाती पर
आसमां वाला भी पसीज गया
हम भी खूब रोए उन घटाओं के साथ
दिन-रात तपते रहे आग में जुदाई की
दिन-रात हमने तुम्हें याद किया

3.

आओ तजदीद-ए-मुहब्बत कर लें
गुनगुनाएं एक गुनगुनी रजाई में
गीत नजीर के, तिल के लड्डू खाएं
साज सब दांत, तबले पर संगत देंगे
सुन्न हाथों को मिलेंगे नए दस्ताने
नाक बहेगी तो गर्म चाय की सुड़की लेंगे
आँख बहेगी तो फिर सर्द होंगे अफ़साने

3.1

कि जो खुद को ही ओढ़ते बिछाते हैं
आसमां की छत, फुटपाथ का गद्दा
थकी थकान का तकिया लगा सो जाते हैं
उनकी दिसंबर में सदियों के कांटे हैं बहुत
एक गोला ऊन नहीं है कि कोई ख़्वाब बुनें
जनवरी, तुम कांटे सा चुभते हो उन आँखों में
और मुझको ये बात बहुत चुभती है

3.2

ये भी कि वो नहीं मांगते हैं
ठिठुरे होठों पर जम चुके सवालों के जवाब,
उनको मालूम नहीं, तुम्हें प्यार करें या न करें
इतना मालूम कि जन्मों का हिसाब है जो
कई जन्मों तक वसूला जाएगा,
कि जो खा रहे हैं ढाबे का ठंडा जूठन
ये उनके कर्मों का फल है या इंतज़ार का फल
मीठा लगता है भूखे को सबकुछ,
कुछ भी कड़वा नहीं लगता सच में
फिर वही रात, नई जंग कुदरत के खिलाफ
सड़क के बीचोबीच एक नो मैन्स लैंड में
घुटने ठोड़ी तक ला आदमी गोल हुआ
ट्रैफिक लाईट के ठूंठ की ओट में
ये जंग देख तुम्हारी भी रूह कांपी थी
तुम थे फ़रकोट में, मैं भी फ़रकोट में

Shikwa

वैसे तुम से है मुझे प्यार बहुत
मैं कुछ दिनों से हूँ बेज़ार बहुत

हुस्न ने जान की कीमत मांगी
महंगा है सच ये कारोबार बहुत

जिसको देखो तपा-तपा सा है
चढ़ा है इश्क का आज़ार बहुत

उनकी ज़ुल्फ़ों में कोई बात तो है
एक-एक ख़म में गिरफ़्तार बहुत

मेयार-ए-चश्म-ए-यार, क्या कहिए
मिकदार जो भी हो, खुमार बहुत

कमर में धार वो कि सीना चाक
दिल को सीने में भी अय्यार बहुत

रिबा-ए-दर्द का हिस्सा ना लिया
मियां तुम निकले ज़ियांकार बहुत

देख ली आपकी भी सरदारी
सर्द निकले मेरे सरकार बहुत

लहू से हाथ रंगे हैं जिस के
हर तरफ़ उसके तरफ़दार बहुत

ये सच नहीं कि ऐतबार नहीं
कर लिया हमने इंतज़ार बहुत

आँधियां ले गई सर से छत को
बारिशों के भी हैं आसार बहुत

बुलहवस बदमिज़ाज दुनिया में
आदमी हो गया लाचार बहुत

चमन समन हुआ बहार आई
आए खुशबू के खरीदार बहुत

गुलों से अपना खूं का रिश्ता है
खार क्यूँ खाएं जो हैं ख़ार बहुत

फिर वही मुश्किलें मुकाबिल हैं
अनार एक और बीमार बहुत

किस्सा-ए-दर्द मुख्तसर बेहतर
कौन सुनता हैं यहाँ यार बहुत

The Common, The Aam

किसी के साथ इनका हाथ। किसी के हाथ इनका साथ। किसी की पार्टी की हैं शान, किसी की पार्टी का हैं नाम। जिनका चिन्ह है अरविंद उनके पुराने हो गए राम, जिसको देखो वही पुकारे जय श्री आम। जय श्री आम। आम चरित मानस की रचना तो कोई नया तुलसी करे पर चरित-रहित राजनीति के मानस का राजा आम है। आज खास नहीं, पेश है एक आम पेशकश।

    आम का नाम बदनाम ना करो

खाने वाले ख़ास हैं, आम है बदनाम है।
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

घर में कोई काट रहा, लोगों में बाँट रहा,
हाथों से दबा दबा पिलपिले को छाँट रहा,
जिसके भी हाथ लगा चूस लिया छोड़ दिया,
रेशे में रस जो बचा घूस सा निचोड़ लिया,
रह गई गुठली सो उसका भी दाम है,
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

हाथों में आम है या आमों का हाथ है,
गिनती ही बतावेगी कौन किसके साथ है,
हरे-हरे आम जाने किसके साथ जाएँगे,
सफ़ेदा ये सोच रहा हम किसको भाएँगे,
केसरिया उलझन में आम नया राम है
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

सीजन शुरू हुआ तो बौराए ख़ूब थे,
आम के किसानों के हौसले मंसूब थे,
मंज़र यूँ बदला कि मंजर नहीं बचे,
फूल कर कुप्पा थे फूल भर नहीं बचे,
मौसम जो करवट ले, किस्सा तमाम है,
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

दागी हुए आमों का कौन ख़रीदार है,
फिर भी ये राजा हैं, इनकी सरकार है,
चुस गए चौसाजी युवा हृदय सम्राट हैं,
कहने को लंगड़े हैं, भागते फर्राट हैं,
तोतापुरी सोच में है, चोंच का ग़ुलाम है।
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

सियासत की फाँस में अल्फांसो फँस गया,
दिल्ली की दलदल में किशनभोग धँस गया,
दशहरी* रोती रही सदर बाज़ार में,
व्यस्त रहा संसद आम के व्यापार में
सिंदूरी जरूर है पर सुबह है या शाम है?
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

——————————————————
*आम पुल्लिंग है, आदमी की तरह। पर दशहरी यहाँ स्त्रीलिंग हो गया/गई है, बाजार के हवाले से। आम भी वैसे ही लचीला है, आप जैसा समझें।

Collateral Damage

You infiltrate into my world
Sneak in
Under the cover of darkness
Into my heart
where it snows through the year
You fire your questions
I retaliate with mine
The innocent answers
Are taken hostage
In the battlefield
Mined with betrayals
Like bullets, accusations fly
And the answers die

I wish we could meet in sunshine
On a bright day, you can see
How much I have bled,
And I can see your face
And the wounds, the bitterness
that I have only a smell of
When we engage in the fiercest fight ever
To slay the past, at last
Your place or mine,
I wish we could bring in some sunshine
Because here, it snows through the year

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तुम दबे पाँव आते हो
अंधेरे की चादर में छिपते-छिपाते
घुसपैठ करने मेरे खाना-ए-दिल में
जहां बरस भर बर्फ़बारी का मौसम रहता है
सवालों की शक्ल में गोलियाँ बरसाते
सामना करता हूँ उनका सवालों से मैं
और हमारे निर्दोष जवाब
मूक बंधक बन जाते हैं
लड़ाई के इस मैदान में
यादों, वादों के बारूदी सुरंगों के बीच
आरोपों के कारतूस सांय-सांय, दाँए बाएँ
और सब जवाब वहीं ढेर हो जाते हैं

काश कभी होते आमने-सामने
दिन के उजाले में
सूरज की नर्म धूप के साए में
तुम देख पाते मेरे सदचाक बदन पर
सभी ज़ख़्मों के निशां
मैं देख पाता तुम्हारा चेहरा
और उस के पीछे का आदमी
और उसके पीछे के सब घाव
जिनका बस एहसास भर है मुझे
कि जिनको मैं जानता-पहचानता नहीं हूँ
फिर चाहे जान देते उस आख़री लड़ाई में
इतिहास को पराजित करने की
तुम्हारे आंगन में या मेरे सहन में, कहीं भी
बशर्ते कि दिन का उजाला हो
सूरज की नर्म धूप का साया हो
क्योंकि मैं जहाँ हूँ वहाँ
बरस भर बर्फ़बारी का मौसम रहता है।

फुलझड़ियाँ

(दीवाली के मौक़े पर पेश हैं कुछ फुलझड़ियाँ, कुछ पटाखे। आपकी दीवाली मंगलमय हो, इसी कामना के साथ। पटाखे तक पहुँचने से पहले फुलझड़ियाँ का आनन्द अलग है।)

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

धनतेरस में पैसे वाला
चौदस में जो संयम टाला
दीवाली में हुआ दिवाला
हो गया बटुआ खाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

नकली घी की बनी मिठाई,
नकली खोया और हलवाई
ऊपर से इतनी महंगाई
नोट भी निकले जाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

चीनी दिये और बाती चीनी
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति चीनी
चीन ने रोज़ी-रोटी छीनी
कितनों की की काली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

दिलबर को हेलो हाई कहता,
हैप्पी दीवाली आई कहता,
अगर ना उसका भाई रहता
लिए खड़ा दुनाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

कल की बात पे है वो स्थिर
आज भी कभी होगा आखिर
वस्ल की बात आई तो फिर
उसने कल पर टाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

अखबारों में है जो आया,
विज्ञापन का है वो सताया,
हीरे का हार इतना भाया,
रूठी है घरवाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

साकी सबको ही देता है,
मयखाने का वो नेता है,
बैठ नज़ारे क्या लेता है,
आगे करो पियाली रे!

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

मनमोहन है भोला-भाला,
घोटालों ने वो रंग डाला,
कोयले से मुंह हो गया काला
लुटिया ही डुबा ली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

ज़्यादातर हैं वो अधिवक्ता
बन बैठे हैं पार्टी प्रवक्ता
बच्चा कोई सुन नहीं सकता
बकते ऎसी गाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

राजनीति की कथा अनंता
सत्ता के सब हैं अभियंता
आम आदमी फ़ूल है बनता
एक फूल सौ माली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

सरकारी सिस्टम के मारे
भ्रष्टाचार के तम के मारे
छाछ पी रहे गम के मारे
सिस्टम खा गया छाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

भारत अपना लोकतंत्र है,
भागीदारी मूल मन्त्र है,
वोट सबसे बड़ा यंत्र है,
बच्चो बजाओ ताली रे!

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

Extra shot:

जहाँ जहाँ नज़र गई हर जगह से तू निकला,
झूठ तेरे जलवों का जलसा चार सू निकला,
बात प्रामाणिकता की नहीं है कि इस देश ने
जिसको भी पिंकी समझा शख़्स वो पिंकू निकला!

Cut it!

हमको तुमने दुश्मन जाना, छोड़ो यार!
तुमको कौनसा था याराना, छोड़ो यार!

हो सकता है होना ही इक सपना हो,
जो था वो था भी या था ना छोड़ो यार!

लाख कहा पर पाल लिया आस्तीनों में,
उन साँपों को दूध पिलाना छोड़ो यार!

किसने कहा था रह-ए-इश्क आसां होगी,
बीच रास्ते स्यापा पाना छोड़ो यार!

अहद-ए-मुहब्बत अहल-ए-वफ़ा की बाते हैं,
भैंस के आगे बीन बजाना छोड़ो यार!

खुद को तो तुम रत्ती भर ना बदल सके,
बदलेगा क्या खाक ज़माना, छोड़ो यार!

कतरे-कतरे से तुम हमरे वाकिफ़ हो,
महफ़िल में हमसे कतराना छोड़ो यार!

रौनक-ए-बज़्म-ए-रिन्दां थी चश्म-ए-साकी,
बिन उसके क्या है मयखाना, छोड़ो यार!

पैंसठ साल से राह तकत है इक बुढ़िया,
वादों से उसको बहलाना छोड़ो यार!

चाहें भी तो कैसे भूलें ज़ख़्म सभी,
तुम तो उनपर नमक लगाना छोड़ो यार!

आँख-लगे को रात जगाना छोड़ो यार,
सपनों में यूं आना जाना छोड़ो यार!

Pleadings to Baba!

ये मुल्क तो ना संभला, हम खुद संभल तो लें!
और कुछ बदल ना पाए, कैबिनेट बदल तो लें!

लूट-ओ-खसोट खूब,
चेहरे पे चोट खूब,
मिलते रहे हैं फिर भी
लोगों से वोट खूब!
जो करेगा, वो भरेगा
जो डरेगा, सो मरेगा,
आम आदमी के वास्ते
लाए थे हम नरेगा!
उस आदमी का नाला,
निकला है यूं दिवाला,
हम क्या दिखाएंगे अब
ये मुंह ही हुआ काला!

नई योजनाओं का पाउडर इस मुंह पे मल तो लें,
और कुछ बदल ना पाए, कैबिनेट बदल तो लें!

बाबा हमें बचाओ,
तुम मिनिस्टर बन जाओ,
भोले ही रहोगे क्या,
थोड़े सिनिस्टर बन जाओ!
अवधि के मध्य में है,
हमरी दूसरी ये नैया,
ये कह रही हैं मैया,
कि तुम हो अब खेवैया!
राजग जगा हुआ है,
तबसे लगा हुआ है,
घटक दलों का क्या है,
कौन किसका सगा है!

युवाओं पे असर हो,
विपक्ष को भी डर हो,
४0 पार कर के भी,
तुम यूथ के लीडर हो!

रस्ता अगर ना निकले, कुछ अरमां निकल तो लें!
और कुछ बदल ना पाए, कैबिनेट बदल तो लें!

Mother, Does It Sound Like A Pink Floyd Song?

| To celebrate the coming Cabinet expansion. First written before a Cabinet expansion in 2006. How things change, or do they? |

Mother, do you think I should drop Khurshid?
Mother, must I include those with insatiable greed?
Mother, do you think Shinde is Sushil enough?
Ooooowaa Mother, why is it so tough?
Mother, must I take Chiranjeevi?
Mother, should I first announce it on TV?
Mother, should I promote Mr Scindia?
Ooooowaa, Mother, you are Mother Indiaaaaah!

Hush, my baby. Baby, don’t you cry.
Momma’s gonna make your Cabinet for you.
Momma’s gonna decide on portfolios too.
Momma’s gonna do it all at 10 Janpath
Momma knows every Congressi’s worth
Momma’s gonna keep it all together for ya
Oooo Babe.
Oooo Babe.
Ooo Babe, of course Momma is Mother India.

Mother, do you think we retain Saifuddin Soz,
Mother, does it really matter where he goes?
Mother, I need help in external affairs
Mother, do you think Krishna really cares?
Mother, what to do with R.P.N. Singh?
Ooooowaa Mother, can I decide anything?

Hush, my baby. Baby, don’t you cry.
Momma’s gonna bring in Manish Tiwari.
Momma will make it crisp as her sari.
Momma’s gonna give one to Chiranjeevi
Momma’s goona reward her tutor Dwivedi.
Momma’s gonna nick Jairam on the way.
Oooo Babe.
Oooo Babe.
Ooo Babe, Rahul Baba will handle MEA

Mother, Agatha Sangma will lose her place,
Mother, should Oscar be in this race?
Mother, there’s an Oriya man called Sahu?
Mother, Andhra already has one in Pallam Raju
Mother, Ambika Soni I guess is from the Punjab,
Ooooowaa Mother, to pay Manish, who do I rob?

Hush, my baby. Baby, don’t you cry.
Momma’s gonna give Sachin independent charge
Momma won’t let anybody get extra large.
Momma’s gonna give MoS to Manicka Tagore
Momma will top that with a boss who’s bore
Momma’s gonna give Jitendra a place in finance
Oooo Babe.
Oooo Babe.
Ooo Babe, Let momma handle it, why’re you getting tense

Mother, should we get Pawar’s daughter?
Mother, what all has he taught her?
Mother, Should Deepa also be considered?
Mother, is my vision getting really blurred?
Mother, one man is totally shockingly ready to buy,
Ooooowaa Mother, shall I sell a ministry to that guy?

Hush, my baby. Baby, don’t you cry.
Momma will handle the Dasmunshi,
Momma will get her a seat in HRD.
Momma’s gonna give Sibal some break
Momma gives, so Momma will take
Momma’s gonna decide whether to sell a seat
Oooo Babe.
Oooo Babe.
Ooo Babe, but you really gotta be a little discrete!

Mother, do you think Jitin’s good enough,
For a Cabinet rank?
Mother, do you think I should just fill in,
What is blank?
Mother will Tariq Anwar be a good choice,
for telecom?
Mother, will he become another
scam bomb?
Mother, should I take Jayanti out of environment?
Mother, what if I hurt some wild sentiment?

Hush, my baby. Baby, don’t you cry.
Momma’s gonna check out your Moilys for you.
Momma won’t let anyone oily get through.
Momma’s gonna scan every new man who’s in.
Momma will always find out where they’ve been.
Momma’s gonna keep Cabinet healthy and clean.
Oooo Babe.
Oooo Babe.
Ooo Babe, you’ll always be Baby to me.

Mother, do you think anything win us fourteen?
Mother, full of scams, shams, all we have been?
Mother, you know Pranabda is on Raisina Hill,
Mother, the void he has left, how do we fill?
Mother do you think we need another Bong?
Mother does it sound like a Pink Floyd Song?
Hush, my baby. Baby, don’t you cry.

Momma’s gonna win you election.
Momma’s gonna make all the selection
Momma’s gonna keep you right here under her wing.
She won’t let you fly, but she might let you sing.
Momma knows it does sound like a Floyd song
Oooo Babe.
Oooo Babe.
Ooo Babe, but of course, you have ruled too long!

Mother, what if you were wrong?

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Raavan

पेट को रोटी,
तन को कपड़ा,
सिर को छत,
बच्चों की शिक्षा अनवरत,
वादे,
यही हैं जो 47 में हुए,
जो 15 में होंगे!

सबको बिजली,
सबको पानी,
सबको गैस,
गरीबी, बेरोज़गारी हटाओ,
मलेरिया भगाओ,
विदेशी हाथ काटो,
मजदूरों में ज़मीन बांटो,
देश की अखंडता,
संविधान की संप्रभुता,
जय जवान, जय किसान,
और वही पाकिस्तान,
नारे,
यही हैं जो 47 में लगे,
जो 15 में लगेंगे!

आरक्षण, सुशासन,
शोषण, कुपोषण,
मरता जवान,
मरते किसान,
भ्रष्टाचार, कदाचार,
पूँजीवाद, समाजवाद,
अपराध, उत्पीड़न,
सांप्रदायिक सद्भाव,
चीज़ों के बढ़ते भाव,
मुद्दे,
वही हैं जो 47 में थे,
यही हैं जो 15 में होंगे

रावण,
47 में जलाया था,
15 में भी जलाएंगे,
रावण वही है,
रावण जलता नहीं है!