ये क्या जगह है दोस्तो

तेरी महफ़िल से उठ कर के देखो़, लोग मक़तल में हैं जा बैठे
गोरे गालों से पीछा छुड़ाया काले दिल वाले चलके आ बैठे

हो दुआ अब यही कि दवा का, मरज़ पर असर हो भी जाए
उन मरीज़ों का क्या इलाज हो जो तमरीज़ा से दिल लगा बैठे

दीन-ओ-ईमान सब छीन ले जो, भूख क्या शै है तुम क्या जानो
तुमसे खाने को ही तो मांगा था तूने धोखा दिया सो खा बैठे

दिल-ओ-दिमाग़ पर हुकूमत है करता, पेट कहने को ही मातहत है
घर में चूल्हा जलाने की ख़ातिर लोग लहू क्या घर ही जला बैठे

हर जगह बेबसी का है आलम हर तरफ़ है यही शोर बरपा
क्या करने चले थे जब चले थे, आज पहुंचे यहां कर क्या बैठे

शकल में और अस्ल में और हैं, मुंह में कुछ है बगल में कुछ है
गोल खम्भों के अपने गोल घर में हम किस किस को हैं बिठा बैठे

उसकी ज़ुल्फ़ों का क़ुसूर है सब, दराज़ इतनी अगर ये बहर है
और ख़म इस कदर कि ग़ज़ल का रदीफ़ उठे तो क़ाफ़िया बैठे

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Hunger Never Goes Out of Fashion

बहुत दिनों के बाद आज बाज़ार गया,
बहुत दिनों के बाद देखे बाज़ार के रंग,
बदला-बदला सा था सब कुछ,
नए फैशन, नए ढंग, नई अदा

मकान मरमर के, दूकान शीशे के,
मॉल जहाँ आबो-हवा नियंत्रित है,
ड्रॉप डाउन से नीचे झांकती प्रियंका,
ब्लैक ड्रेस में वोदका बेचती हुई

आदमकद पुतलों के बाजू में दमकते हीरे,
और मेमों की नुकीली हीलें,
कैटवाक करती हुई कन्याएं,
कॉफीशॉप में खिलखिलाती हुई,
यहीं ज़मीं पर सब्ज़बाग-ए-जन्नत

लड़के भी कौन पीछे मिले,
जींस की ब्राण्ड दिख रही थी मगर,
अंडरवेअर का ब्राण्ड ऊपर था,
बच्चे क्रॉक्स में काकुल करते,
माएं ट्रॉली में उनको टहलाती,
नए फैशन, नए ढंग, नई अदा..

बच्चे मॉल के बाहर भी थे,
सरसों के तेल में शनि को लिए,
ट्रैफिक लाईट पे फुक्के फुलाते हुए,
कार के भीतर के बच्चे को ललचाते हुए

चाय की केतली लिए सरपट,
उस खोमचे वाले से मिमियाते हुए,
जिसके यहाँ इक बच्चा
लोगों की कटोरियाँ साफ़ करता है,
किस्मत अच्छी हो तो जीभ से अपनी,
वरना हाथ ये किस काम के हैं

मॉल के बाहर की औरतें कैसी हैं,
एक नन्हें बदन पर कालिख मल कर,

एक डाक्टर की पर्ची लिए घूमती है,
ये भीख मांगने का नया चलन है,
नए फैशन, नए ढंग, नई अदा

बहुत दिनों के बाद आज बाज़ार गया,
बहुत दिनों के बाद देखे बाज़ार के रंग,
बदला बदला सा था सब कुछ,
नए फैशन, नए ढंग, नई अदा

बस एक चलन है जो नहीं बदला ज़रा भी,
भूख कभी आउट ऑफ फैशन नहीं होती.