Reasonable Restrictions

बोलने का हक तो है, आवाज़ पे पाबंदी है!
मिज़ाज ये है कि मजाज़ पे पाबंदी है!

हम को मालूम है किस्से का अंजाम मगर,
इन्तेहाँ ये है कि आगाज़ पे पाबंदी है!

हाल-ए-दिल कह भी दें तो किस से कहें,
हमराज़ हैं बहुत, पर राज़ पे पाबंदी है!

हुस्न तो खूब इलाही ने उसे बख्शा है,
शोखी-ए-हुस्न को बस नाज़ पे पाबंदी है!

पर सलामत हैं मेरे, हौसला भी कायम है,
गर इजाज़त ना हो परवाज़ पे पाबंदी है!

ग़ालिबन और थे अंदाज़-ए-बयां ग़ालिब के,
सुर मिलाना है, सो अंदाज़ पे पाबंदी है!

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Whys of Whats

वो पूछते हैं कि क्यों चुप हूँ मैं, हुआ क्या है?
वजह गर जानता तो बता देता कि क्या क्या है!

तुम्हें गरज है फिर तर्क-ए-तआल्लुक ही सही,
हमें हरज है मगर इसमें हमारा क्या है?

वतन आज़ाद हुआ तो कौन सा आबाद हुआ,
वतन-परस्ती का आज़ादी से रिश्ता क्या है?

ख्वाम्खाह तोड़ गए सारे मरासिम हम से,
यही है रस्म तो फिर दिल का तोड़ना क्या है?

सुबह-ए-फिराक है जागें भी तो क्योंकर जागें
सोहबत-ए-शब की सिलवटों में रखा क्या है?

मैं तो इक रात को ताउम्र ओढ़े बैठा हूँ,
तुम्हारे चेहरे पे बरसों का ये पर्दा क्या है?

लगी जो आग तो सब जल गया बचा क्या है
अगर जिंदा है जुस्तजू तो फिर जला क्या है?