Durga!

पूजो पंडाल में, घर में हो तो हाय-ओ-हू करो,
मन में रावण को पालो, पुतले को धू-धू करो!

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते का मतलब यही है अब,
जिसे कैद करना है, उसकी पूजा शुरू करो!

मोहल्ले की लड़कियों को नौमी में खिलाओ,
पुत्रम देहि, दशमी को माँ से आरज़ू करो!

एक लड़की को भेड़ियों ने है नोंचा, खसोटा,
तंग कपड़ों पे तंज, करेक्टर पर थू-थू करो!

हुरमत के लिए उसकी करो आगजनी भी,
अकेले में मिल जाए तो बेआबरू करो!

मिट्टी की बनी बुत की परस्तिश हो मुकम्मल,
जो साबुत सी है उस से तो कभी दू-ब-दू करो!

ज़रूरी है इबादत में सफाई ज़ेहन की भी,
दिल साफ़ नहीं है तो फिर जितना वुज़ू करो!

सहाफी ना  बिके, अखबार तो बिकता ही है,
तुम लाख तेग कलम और सियाही लहू करो!

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हाय-ओ-हू: much crying in disappointment  | धू-धू: used with burning | यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते: Part of Sanskrit shlok यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता (Where women are worshipped, gods reside there) | पुत्रम देहि: Part of Devi’s mantra धनं देहि, प्रियं देहि, पुत्रम देहि सुरेश्वरी. Bless us with wealth, bless us with happiness and bless us with sons |  दशमी: Tenth and final day of Puja, Dussehra | तंज: sarcastic comment | हुरमत: honour | आगजनी: arson  | बेआबरू: outraging someone’s modesty | बुत: idol | परस्तिश: worship | मुकम्मल: complete | साबुत: real | दू-ब-दू: facing someone | सहाफी: journalist | तेग: sword

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