Morning After

दीपावली की रात की सुबह नहीं होती
दिन होता है
जब रात की चुंधियाई आँखें
उबासियाँ लेकर खुलती हैं
और घर के सामने सड़क पर
युद्धक्षेत्र का आभास होता है
रात के अनार औंधे पड़े देखते हैं
लड़ियों ने जल कर कैसे फूल की
पखुडियाँ बिखेरी हैं
सड़क के आवारा कुत्ते
जो ना जाने कहाँ गायब रहे सारी रात
दबे पाँव सूंघते हैं घटनास्थल को
ज़्यादातर घरों में रौशनी की कतारें
आखिरी घड़ी की तरह जलती-बुझती
रात का धुंआ छत से ठीक ऊपर
चादर बन सूरज से कहता कि
थोड़ी देर बाद आना, घर में सब सो रहे हैं
गेंदे की गंध में घी मिलाया है रात ने
और चासनी सी तैर रही है,
ड्राइंग रूम में रखे कृत्रिम फूलों को मुंह चिढाती
इन गेंदों को बहते पानी में जाना है
जल्द ही
सारे सबूत आज मिटाए जाएंगे
अपने बालों से बारूद की बू
पटाखे के दुकान की रसीद
सेंटर टेबल के नीचे की खाली बोतलें
और किचन के सिंक में बर्तनों का पहाड़
रहेगी तो बस दरवाज़े पर रंगोली
जब तक रहे,
शुभ दीपावली का चाइनीज़ झालर
जब तक टिके!

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फुलझड़ियाँ

(दीवाली के मौक़े पर पेश हैं कुछ फुलझड़ियाँ, कुछ पटाखे। आपकी दीवाली मंगलमय हो, इसी कामना के साथ। पटाखे तक पहुँचने से पहले फुलझड़ियाँ का आनन्द अलग है।)

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

धनतेरस में पैसे वाला
चौदस में जो संयम टाला
दीवाली में हुआ दिवाला
हो गया बटुआ खाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

नकली घी की बनी मिठाई,
नकली खोया और हलवाई
ऊपर से इतनी महंगाई
नोट भी निकले जाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

चीनी दिये और बाती चीनी
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति चीनी
चीन ने रोज़ी-रोटी छीनी
कितनों की की काली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

दिलबर को हेलो हाई कहता,
हैप्पी दीवाली आई कहता,
अगर ना उसका भाई रहता
लिए खड़ा दुनाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

कल की बात पे है वो स्थिर
आज भी कभी होगा आखिर
वस्ल की बात आई तो फिर
उसने कल पर टाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

अखबारों में है जो आया,
विज्ञापन का है वो सताया,
हीरे का हार इतना भाया,
रूठी है घरवाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

साकी सबको ही देता है,
मयखाने का वो नेता है,
बैठ नज़ारे क्या लेता है,
आगे करो पियाली रे!

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

मनमोहन है भोला-भाला,
घोटालों ने वो रंग डाला,
कोयले से मुंह हो गया काला
लुटिया ही डुबा ली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

ज़्यादातर हैं वो अधिवक्ता
बन बैठे हैं पार्टी प्रवक्ता
बच्चा कोई सुन नहीं सकता
बकते ऎसी गाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

राजनीति की कथा अनंता
सत्ता के सब हैं अभियंता
आम आदमी फ़ूल है बनता
एक फूल सौ माली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

सरकारी सिस्टम के मारे
भ्रष्टाचार के तम के मारे
छाछ पी रहे गम के मारे
सिस्टम खा गया छाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

भारत अपना लोकतंत्र है,
भागीदारी मूल मन्त्र है,
वोट सबसे बड़ा यंत्र है,
बच्चो बजाओ ताली रे!

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

Extra shot:

जहाँ जहाँ नज़र गई हर जगह से तू निकला,
झूठ तेरे जलवों का जलसा चार सू निकला,
बात प्रामाणिकता की नहीं है कि इस देश ने
जिसको भी पिंकी समझा शख़्स वो पिंकू निकला!