Johar Jharkhand

हमार झारखण्ड है, तोहार झारखण्ड है,
और जो बच गए जोहार झारखण्ड है!

कहते हैं कि बाबा बिराजते हैं झारखंड में.
अब तो वो बिराजते हैं कि बाबा रे बाबा.
बाबू बिराजे जब बिहार से अलग हुए,
अर्जुन लास्ट में सत्ता से थलग हुए.
झारखंड में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर
बिराजने वालों की लाइन
है बड़ी ही फाइन.

चार लोग आठ बार कुर्सी पर बैठे हैं,
दो बार कुर्सी ही राजभवन हो आई है.
लेटेस्ट ये है कि हेमंत के नीचे होगी,
कांग्रेस के दूध में धुल के ताज़ा सेक्यूलर
हुए हैं, तो राजद भी पीछे होगी!

पिताजी घंटाल थे, गुरूजी कहलाते थे.
पर फ़ेल हो जाते थे जब गुर आजमाते थे.
अब कांग्रेस का हाथ थाम कर कुर्सी बेटे ने हथियाई है.
झारखंड की बने ना बने, राजनीति की  बन आई है.
बिहार के बंटवारे के दिन से बंदरबांट ज़ारी है.
लोहा खाने वालों को जंग लग गया है,
करप्शन का कोयला तब से लोहे पर भारी है.

जब बिहार का हिस्सा थे
तो गुरूजी सबसे बड़ा किस्सा थे.
झारखंड को बिहार से मुक्ति दिलाने के लिए मोर्चा खोल रखा था.
संसद में समर्थन की दूकान खोली तो
राव ने १ करोड़ पर एमपी का मोल रखा था.

इतनी जगहंसाई हुई कि राज्य मिला तो राज नहीं.
हाथ माला और सोच लिया कल मिलेगा जो आज नहीं  

भाजपा ने जदयू और समता पार्टी को साथ लिया
और बाबूलाल मरांडी बने पहले मुखिया,
राज्य सबसे धनी और लोग सबसे दुखिया.
नए राज्य में नया माल गपोसने में किसका हिस्सा कितना हो,
इस पर गठबंधन ही टूट गया.
उस दिन ही वो नया सपना दूर कहीं छूट गया.
खंडित जनादेश था,
मिलकर चलो ये आदेश था.
मिलकर लूटना सुन लिया सियासत ने.
बार बार टूटना सीखा रियासत ने.
टूटना ही तो खंड-खंड होना है,
अपनों से धोखे खाना झारखण्ड होना है.

मुंडा ने रूठों को मनाया,
दो साल चलाया.
चुनाव के बाद शिबू सोरेन ने अल्पमत सरकार बनाई,
दस दिन नहीं चल पाई.
फिर मुंडा ने निर्दलीयों से समर्थन जुटाया,
एक साल में ही एक निर्दलीय को गज़ब का आईडिया आया.
हमारे बैसाखी पर जब सरकार खड़ी है,
तो हम बड़े हैं या सरकार बड़ी है?
मधु कोड़ा निर्दलीयों के साथ निकल पड़े.
मुंडा के पाँव तले ज़मीन खिसक गई.
गणतंत्र की पीठ पर इतिहास में ऐसा कोड़ा नहीं पड़ा था.
एक अकेला, निर्दलीय विधायक कुर्सी पर जा चढ़ा था.
मधु तो थोड़ा-थोड़ा कर के छत्ता ही चाट गए.
बाकी जो आए वो भी आपस में बांट गए.

कब से चल रहा ये राजनीतिक दंगल है
ज़मीन के पथरीले बदन पर जंगल है,
पेट के भीतर लोहा है, सोना भी.
पाप हुआ पेट से होना भी
पेट चीर कर खदान बने हैं,
जिनसे सेठों के कलकत्ते में मकान बने हैं.
कोयला देश भर में जाता है,
तो देश भर में बिजली आती है.
यहाँ अभी देर है,
अभी तो अंधेर है.

नक्सल-प्रभावित राज्य है
तो सुरक्षा का भी पैसा है,
विकास नहीं कर पाने का बहाना है,
विकास का भी पैसा है,
ना हो पाने वाले विकास का भी कुछ ऐसा है,
कोयला है, कोलियरी है, कारखाना है भारी,
सैयां करते जी कोल बाजारी.
अयस्क में नंबर वन होते हुए भी
वयस्क नहीं हो पाया.
बच्चे को जिसने चाहा लॉलीपॉप थमाया.
साथ ही पैदा हुआ छत्तीसगढ़
दिन दूनी रात छत्तीस गुनी तरक्की कर रहा है.
पड़ोस में पड़ोसी जीते जीते मर रहा है
झारखंड एक प्रश्न है जिसका उत्तर नहीं,
दक्षिण भी नहीं, जो है वो थोड़ा वामपंथ है.
उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा आई तो देश सिहर गया,
यहाँ प्रकृति पर आपदा है, आपदा की प्रवृति है.

विधानसभा त्रिशंकु रहने की आदी हो गई है.
ऐसे में जोड़-तोड़,
मोल-भाव
चलता रहता है.
सरकारें आती हैं,
जाती हैं.
राष्ट्रपति के शासन के दोनों तरफ.
भ्रष्टाचार की ऐसी मिसाल बनाते हैं
कि दिल्ली शरमा जाती है
रांची की आंच में.
दिल्ली इस खसोट में शामिल है,
उसका हिस्सा हर नोट में शामिल है.
जलप्रपातों में ज़हर किसने घोला है,
इस सवाल के जवाब में सच कौन बोला है.
आदिवासी-दिकु का विभाजन है,
विभाजन के बाद.
आदिवासियों में हो, उरांव, मुंडा आदि का भी तो बंटवारा है.
भय और भूख. अनंत है, अनादि है.
नुक्कड़ पे रंगबाज है, जंगल में माओवादी है.
बहते हुए खून से हर वासी आदी है.
यहां का हर आदमी आदी वासी है.

झारखंड के जंगल में मंगल हो रहा है.
बुध्धू हंडिया का सोम चढ़ा के
गुरु को शुक्र है शुक्र है कह रहा है
क्योंकि सनीचर को इतवार का इंतजाम करना है.
बुद्धू बेचारे को सातों दिन काम करना है
क्रशर पर जाकर गिट्टी फोड़ना है
काम क्या दिन भर पत्थर तोड़ना है
क्योंकि बाकी वो जो सिलसिला है
तेरह सौ सालों से नहीं टूटा है,
तेरह साल में कहां से टूटेगा?

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फुलझड़ियाँ

(दीवाली के मौक़े पर पेश हैं कुछ फुलझड़ियाँ, कुछ पटाखे। आपकी दीवाली मंगलमय हो, इसी कामना के साथ। पटाखे तक पहुँचने से पहले फुलझड़ियाँ का आनन्द अलग है।)

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

धनतेरस में पैसे वाला
चौदस में जो संयम टाला
दीवाली में हुआ दिवाला
हो गया बटुआ खाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

नकली घी की बनी मिठाई,
नकली खोया और हलवाई
ऊपर से इतनी महंगाई
नोट भी निकले जाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

चीनी दिये और बाती चीनी
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति चीनी
चीन ने रोज़ी-रोटी छीनी
कितनों की की काली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

दिलबर को हेलो हाई कहता,
हैप्पी दीवाली आई कहता,
अगर ना उसका भाई रहता
लिए खड़ा दुनाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

कल की बात पे है वो स्थिर
आज भी कभी होगा आखिर
वस्ल की बात आई तो फिर
उसने कल पर टाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

अखबारों में है जो आया,
विज्ञापन का है वो सताया,
हीरे का हार इतना भाया,
रूठी है घरवाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

साकी सबको ही देता है,
मयखाने का वो नेता है,
बैठ नज़ारे क्या लेता है,
आगे करो पियाली रे!

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

मनमोहन है भोला-भाला,
घोटालों ने वो रंग डाला,
कोयले से मुंह हो गया काला
लुटिया ही डुबा ली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

ज़्यादातर हैं वो अधिवक्ता
बन बैठे हैं पार्टी प्रवक्ता
बच्चा कोई सुन नहीं सकता
बकते ऎसी गाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

राजनीति की कथा अनंता
सत्ता के सब हैं अभियंता
आम आदमी फ़ूल है बनता
एक फूल सौ माली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

सरकारी सिस्टम के मारे
भ्रष्टाचार के तम के मारे
छाछ पी रहे गम के मारे
सिस्टम खा गया छाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

भारत अपना लोकतंत्र है,
भागीदारी मूल मन्त्र है,
वोट सबसे बड़ा यंत्र है,
बच्चो बजाओ ताली रे!

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दीवाली रे!

Extra shot:

जहाँ जहाँ नज़र गई हर जगह से तू निकला,
झूठ तेरे जलवों का जलसा चार सू निकला,
बात प्रामाणिकता की नहीं है कि इस देश ने
जिसको भी पिंकी समझा शख़्स वो पिंकू निकला!

Splitting hairs: Bujhe diye mein tel daalte ho miyaan!

हम दाग-दाग हैं तो तुम कौन से शफ्फाक हो,
कौन है जिसका धुलेटी में दामन पाक हो,

नाम है, बदनाम हैं, बेईमानी के इलज़ाम हैं,
हर नए आरोप पर, प्रत्यारोप के इंतजाम हैं,
जो कीचड़ उछालते हैं, उनके अपने काम हैं,

जो तोड़ ना सको तो उनकी बाहें ही मरोड़ दो,
और बात ना बने तो उनपर प्रवक्ता छोड़ दो,

कुछ भौंकने के लिए, कुछ काटने के लिए,
हम पालते हैं, तुम भी पालते हो मियाँ!

यूं उधेड़ोगे तो दोनों ही उधड़ जाएंगे,
क्यों बाल की खाल निकालते हो मियाँ!

नहीं प्रत्यक्ष के, तो अप्रत्यक्ष के अवसाद हैं,
कहीं अध्यक्ष हैं, कहीं अध्यक्ष के दामाद हैं,
जितने किसिम के लोग, उतने किसिम के विवाद हैं,

दुनिया पैसे से चलती है,
बस विपक्ष को खलती है,
सत्ता में हैं,
इसमें हमारी क्या गलती है!

ऐसे चलता है, भविष्य में भी ऐसे ही चलेगा,
नहीं तो लोकतंत्र का विशाल हाथी कैसे पलेगा!

Bazm-e-rang Boomerang

 

 

 

 

 

 

 

जब तलक बज़्म में रौनक आई,
तमाशा बन गए तमाशाई!!

उगा जो शहर तो खामोश है झील,
लवासा तुम हो, मैं धराशाई!

जो अंजलि से काई उछाला करते थे,
उनके दामन पे पड़ गया काई!

उनकी टोपी लगाए फिरते थे,
जिनकी टोपी पर ही बन आई!

जो गाँधी थे आश्रम गए वापस,
ना रास आई उनको रुसवाई!

ना लगे आग, दाग तो लगेगा ही,
साफ़ दामन की हो पज़ीराई,

नित नए राज़ खुलते हैं यहाँ,
चौपट राजा का राज है भाई!

तब्सरा करते रहे आलिम साहिब,
सामईन लेते रहे जम्हाई!

इधर कांग्रेस है, उधर एनडीए,
यहाँ कुआं तो उस तरफ खाई!

 

Rahiman some patience, there’s always hope; Every one perishes, sinner and the Pope!

दर्द-ए-दौर-ए-ज़माना है, थोड़ा धीरज रखो!
वो भी इतना पुराना है, थोड़ा धीरज रखो!

अंधेर मची रहती है, अन्धों की बस्ती में,
तिस पे राजा काना है, थोड़ा धीरज रखो!

यां पीपल के पेड़ों पर आमों का झुरमुट है,
रिपब्लिक ही बनाना है, थोड़ा धीरज रखो!

चुन-चुन कर भेजा है, चुन-चुन घर भेजेंगे,
चुनाव भी तो आना है, थोड़ा धीरज रखो!

दिल्ली की सर्दी में, जम जाती हैं तक़दीरें,
जो वो लोहा पिघलाना है, थोड़ा धीरज रखो!

सियासत के कोल्हू में अन्ना हो गन्ना हो,
उन्हें पिरते जाना है, थोड़ा धीरज रखो!

केजरीवाल के साथ नारे लगाते रहिए!

ज्यों चले काम, अपना काम चलाते रहिए,
खाते रहने के लिए कुछ उनको खिलाते रहिए!

ले-दे के निपट जाए तो हर काम है अच्छा,
ना बने बात तो फिर बात बनाते रहिए!

बिलखते बच्चे के लिए दूध भी नसीब कहाँ,
जम्हूरियत के पालने को हिलाते रहिए!

धूप की धार बड़ी तेज है, लंबा है सफर,
चलिए खुर्शीद को फिर खून पिलाते रहिए!

मर-मर के बनाई है ये मरमर की इमारत,
जो हो सके तो उसमें झाड़ू लगाते रहिए!

जो गुना भाग है अंदर ही अंदर मत गुनिए,
कुछ हमरी सुनिए कुछ हमको सुनाते रहिए!

सबको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन,
चचा ग़ालिब की तरह दिल को बहलाते रहिए!

 

The Hammam

नंगे हैं हम हम्माम है सारा जहाँ हमारा 

हम्माम में हम सब नंगे,
हर हर गंगे, हर हर गंगे!

स्कैम में घुस गई सिंचाई,
गडकरी पवार मौसेरे भाई,
सब डकारे, डकार ना आई,
डैम, गॉडडैम ना कर पंगे!
लोकतंत्र के रंग बिरंगे!

हम्माम में हम सब नंगे,
हर हर गंगे, हर हर गंगे!

बन्दर बाँट में बन्दर हो लो,
हो सको तो अंदर हो लो,
बहती गंगा में तुम धो लो,
अपने हाथ भी ओ भिखमंगे,
कठौती में है, गर तुम चंगे!

हम्माम में हम सब नंगे,
हर हर गंगे, हर हर गंगे!

Khurshid. A Ghazal.

तपिश में देर तलक तड़पे तेरी दीद को,
फिर लाए हैं वादा-ए-वफ़ा तजदीद को!

चाँद बन कर जो आए सर-ए-बाम तुम,
और चाँद लग गए हैं मेरी ईद को!

इक बुत से फिर उम्मीद है इक शाम की,
ये क्या हो गया है मेरी उम्मीद को!

जिबह होना तो बकरे की तकदीर है,
अम्मा खैर क्या मनाएगी बकरीद को!

जब से सिर पर चढ़ा है, बड़ा सरचढ़ा है,
दिन ढले डूबना है फिर खुर्शीद को!

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तपिश: Heat | दीद: Seeing | तजदीद: Renewal | खुर्शीद: Sun

Whys of Whats

वो पूछते हैं कि क्यों चुप हूँ मैं, हुआ क्या है?
वजह गर जानता तो बता देता कि क्या क्या है!

तुम्हें गरज है फिर तर्क-ए-तआल्लुक ही सही,
हमें हरज है मगर इसमें हमारा क्या है?

वतन आज़ाद हुआ तो कौन सा आबाद हुआ,
वतन-परस्ती का आज़ादी से रिश्ता क्या है?

ख्वाम्खाह तोड़ गए सारे मरासिम हम से,
यही है रस्म तो फिर दिल का तोड़ना क्या है?

सुबह-ए-फिराक है जागें भी तो क्योंकर जागें
सोहबत-ए-शब की सिलवटों में रखा क्या है?

मैं तो इक रात को ताउम्र ओढ़े बैठा हूँ,
तुम्हारे चेहरे पे बरसों का ये पर्दा क्या है?

लगी जो आग तो सब जल गया बचा क्या है
अगर जिंदा है जुस्तजू तो फिर जला क्या है?