Che Ganwara!

आस के बंधन टूट गए हैं
बालम मो से रूठ गए हैं।

भगवा तन और मन अंगरेज
कौन सो रंग दियो रंगरेज
बीतो बरस अब, कछु नहीं सरस अब
नर के इंद्र भी दिखैं अबस अब
जड़-चेतन में सगरे जगत में
का देखौ तुम अपने भगत में
काहै चेहरा मोड़ लिए हौ
हमसे रिश्ता तोड़ लिए हौ।

कितनी गाथा हमने बांची
आधी झूठी आधी सांची
तुम को पालन हार बताके
जीवन का सब सार बताके
कहो विकास कहां है किधर है
वही तमाशा उधर इधर है
कागद कारे कर कर हारे
तुम ही हमको भूले बिसारे।

रुसवाई का कारण का है
जगहंसाई बेकारण का है
हमरी अरज तुम्हरी भी होती
हमरी गरज हमरी ही क्यों है
भागत-भगत कहां आ पहुंचे
तुम्हरे जगत में हम ना पहुंचे
सपन सलोना कोना कोना
हमरे माथे लिखा था रोना

आस के बंधन टूट गए हैं
बालम मो से रूठ गए हैं।

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