Confidence Motion

इसमें ड्रामा है, एक्शन है और टोटल इमोशन है,
आज उनके सदन में हमारा कांफिडेंस मोशन है!

ये मोशन लूज़ था अब तक, रहे महफूज़ ये कब तक?
ये सिस्टम है जो शासन का यहां परदे में शोषण है!

विश्वास हो या मत हो, जो हो गर जनता का मत है तो,
है किस बात की प्रॉब्लम, और किस बात की टेंशन है!

ज़िन्दगी चार दिन की है, तो पहले दो ही दिन में दोस्त
दो वादे कर दिए पूरे, अब आगे जो भी अड़चन है!

खाज पावर की ऐसी है खुजाने से नहीं जाती,
इस खुजली के लिए जालिम कोई पाउडर न लोशन है!

मेरे महबूब तेरी महफ़िल में मेरी समझ नहीं आता,
ये अन्दर से खिटपिट है या बाहर से अनबन है!

अगर मैंडेट देना था तो कुछ तगड़ा सा दे देते,
है जन्म से लंगड़ा, और उस पर भी कुपोषण है!

इसके काटे का कहते हैं कि पानी तक नहीं मांगे,
उन्हीं का, या खुदा, हमको भी बाहर से समर्थन है!

सपोर्ट दुश्मन का है, उस पर ये डॉक्टर हर्षवर्धन है,
मरीज़ हैं आप तो फिर आपका मालिक ही भगवन है!

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The Common, The Aam

किसी के साथ इनका हाथ। किसी के हाथ इनका साथ। किसी की पार्टी की हैं शान, किसी की पार्टी का हैं नाम। जिनका चिन्ह है अरविंद उनके पुराने हो गए राम, जिसको देखो वही पुकारे जय श्री आम। जय श्री आम। आम चरित मानस की रचना तो कोई नया तुलसी करे पर चरित-रहित राजनीति के मानस का राजा आम है। आज खास नहीं, पेश है एक आम पेशकश।

    आम का नाम बदनाम ना करो

खाने वाले ख़ास हैं, आम है बदनाम है।
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

घर में कोई काट रहा, लोगों में बाँट रहा,
हाथों से दबा दबा पिलपिले को छाँट रहा,
जिसके भी हाथ लगा चूस लिया छोड़ दिया,
रेशे में रस जो बचा घूस सा निचोड़ लिया,
रह गई गुठली सो उसका भी दाम है,
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

हाथों में आम है या आमों का हाथ है,
गिनती ही बतावेगी कौन किसके साथ है,
हरे-हरे आम जाने किसके साथ जाएँगे,
सफ़ेदा ये सोच रहा हम किसको भाएँगे,
केसरिया उलझन में आम नया राम है
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

सीजन शुरू हुआ तो बौराए ख़ूब थे,
आम के किसानों के हौसले मंसूब थे,
मंज़र यूँ बदला कि मंजर नहीं बचे,
फूल कर कुप्पा थे फूल भर नहीं बचे,
मौसम जो करवट ले, किस्सा तमाम है,
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

दागी हुए आमों का कौन ख़रीदार है,
फिर भी ये राजा हैं, इनकी सरकार है,
चुस गए चौसाजी युवा हृदय सम्राट हैं,
कहने को लंगड़े हैं, भागते फर्राट हैं,
तोतापुरी सोच में है, चोंच का ग़ुलाम है।
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

सियासत की फाँस में अल्फांसो फँस गया,
दिल्ली की दलदल में किशनभोग धँस गया,
दशहरी* रोती रही सदर बाज़ार में,
व्यस्त रहा संसद आम के व्यापार में
सिंदूरी जरूर है पर सुबह है या शाम है?
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

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*आम पुल्लिंग है, आदमी की तरह। पर दशहरी यहाँ स्त्रीलिंग हो गया/गई है, बाजार के हवाले से। आम भी वैसे ही लचीला है, आप जैसा समझें।