कानों देखी, आँखों सुनी

आदमी चाह ले तो काम बड़ा कोई नहीं,
जर्फ़ जिंदा हो तो फिर जाम बड़ा कोई नहीं,
बस के इंसान को इंसान होना मुश्किल है,
बढ़ के इस से यहाँ इनाम बड़ा कोई नहीं!

हमको माजी के दरीचे में खड़ा रहने दो,
और फर्दा पर जो पर्दा है पड़ा रहने दो,
तुम्हारे तीर मेरे बदन पे बहुत फबते हैं,
ये जवाहर मेरे सीने पे जड़ा रहने दो!

हाथ है, मसलते हैं, सर है तो धुनते हैं,
गुण अवगुण सभी मन में ही गुनते हैं,
जो कभी लिहाफ-ए-एहसास में गांठें आएं,
अपनी माजी की रुई आप ही हम धुनते हैं!

ख्वाब तो ख्वाब हकीकत भी हम बुनते हैं,
फूल हो जाते हैं कांटे भी अगर चुनते हैं,
देख लेते हैं सब कानों से ही नाबीना,
और जो बहरे हैं आँखों से सब सुनते हैं!

 

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Marham

जब कोई भी नया ग़म मिला है, جب کوئی بھی نیا غم ملا ہے
मेरे ज़ख्मों को मरहम मिला है. میرے زخموں کو مرہم ملا ہے

यूं मिला तो बहुत कुछ बहुत है, یوں ملا تو بہت کچھ بہت ہے
जो कम था वही कम मिला है جو کم تھا وہی کم ملا ہے

तेरी लागर्ज़ी मर्ज़ी है तेरी تیری لاگرزی مرضی ہے تیری
मर्ज़ हमको भी बाहम मिला है  مرض ہمکو بھی باہم ملا ہے

बज़्म-ए-ग़ैरां है हैरां किस शै पर, بزم غیراں ہے حیراں کس شی پر
जब मिला हमको बरहम मिला है جب ملا ہمکو برہم ملا ہے

तेरी आँखों के पीछे जुबां है تیری آنکھوں کے پیچھے جباں ہے
बोलती हैं कोई पुरनम मिला है بولتی ہیں کوئی پرنم ملا ہے

शरबत-ए-हिन्द पूछो ना लज्ज़त  شربت ہند پوچھو نہ لذّت
गंगाजल में आब-ए-ज़मज़म मिला है گنگاجل میں اب زمزم ملا ہے

Forgive

काश तुम देख पाते करोड़ों हाथ
पढ़ पाते लाखों चेहरे,
चेहरों पर आंसुओं की पंक्तियां को
तमतमाते क्रोध के पीछे की याचना
तुम्हारे लिए इंसाफ़ मांग रहे नारों के पीछे
सब मांग रहे हैं तुमसे भीख
हमें माफ़ी दे दो

पुत्रम् देहि की प्रार्थना से लेकर,
पुत्रवती भव के आशीर्वाद तक,
तुम्हारे जन्मते ही माथे पर लकीरों का संचय
तुम्हारे दहेज के लिए धन का
और तुम्हें पराया धन की संज्ञा देना,
हर परंपरा की विकृति का
संज्ञान नहीं लेने के लिए
हमें क्षमा करना बेटी

पहली बार तुम्हें चौक पर
भीड़ में पिसते देख आंख बचाने के लिए
फिर ख़ुद को यह कहने के लिए
कि कौन लड़ता उन गुंडों से
आस-पास राक्षस पलते रहे हम चुप रहे
हम बोले तो दबी जबान में बोले
तुम्हारे बोलने को अनसुना करने के लिए
और इसलिए भी कि हम ने
आज तक माफ़ी तक नहीं मांगी तुमसे
हमें माफ़ कर देना बहन।

तुम्हारी मौत पर सियासत करते हैं
उन निर्लज्जों को भी, जिनके मुंह से
क्षमा याचना नहीं निकलेगी कभी
उनको भी जिन्होंने
तुम्हारी पीड़ा को नक़ली नाम दिया
जिससे वह दर्द दामिनी की अमानत रहे
और भय इतना कि तुम्हें निर्भया कहा
जबकि तुम्हारा नाम था एक।
और है भी
नारी
हमें क्षमा करना

Letters, Words & a Sentence

Life is not a word.
Life is a sentence.
Made of a four-letter word.
Like that.

Death is not a sentence.
Death is a word.
A five-letter word.
Like birth.

Pain is a four-letter word.
Like love. Or life.
Like like.
It’s here. To bear.

God is a three-letter word
Like Sun.
You too have three letters.
Like one.

You become U. To be equal to I.
But that is underspelling.
Truth is I am two letters short.
To become you.

One, two, six, and ten have three.
Three, seven, eight have five.
Nine and five have four.
They meet at four. Therefore.

Lamb’s Tale

बहुत हुआ कि अब नहीं मेरे सरकार नहीं
यक़ीन तुमपे है तेरे वादों पे ऐतबार नहीं

और कितने बरस होगा इंतज़ार-ए-बहार
इंतहा हो चुकी अब सब्र-ए-इंतज़ार नहीं

हमें तो उज्र है बस हाँ में हाँ मिलाने से
तुम्हारी बात से हमको कोई इनकार नहीं

कभी कभार जो हो जाए खता होती है
मुआफ़ कर दूं गर सताओ बार बार नहीं

सर को छत बदन को वर्क पेट को रोटी
हक़ ये नारों के हक़ीक़त में नमूदार नहीं

मसखरी करता है महफिल में इंतख़ाब तेरा
तुम शर्मिंदा हो पर ज़रा भी शर्मसार नहीं

चमन क्या करे इक गुल के गुलमटे इतने
ग़ुलाम ख़ुशरू के ख़ुशबू के पैरोकार नहीं

दिया हमीं ने हुकूमत का अख़्तियार तुम्हें,
हमारा तुमपे कभी कोई अख़्तियार नहीं?

ये आम राय है ज़ालिम हो मुन्तख़ब रहबर
यही है राह तो फिर हमको करो शुमार नहीं

ज़ुल्म ऐसा कि ख़ुद की सोच जुर्म जैसा है
इल्म इतना नहीं ये इश्क़ है व्यापार नहीं

कितनी तारीक़ हैं ये जुल्मतें जहालत की
कि तालिब भी रोशनी के तलबगार नहीं

तुम्हारी याद के धागों से ख़्वाब बुनता हूं
तेरी क़सम मेरा और कोई रोज़गार नहीं

साकिया हो चुका रिंदों का इम्तिहान बहुत
तेरा ख़ुमार है मय का कोई ख़ुमार नहीं

ये क्या जगह है दोस्तो

तेरी महफ़िल से उठ कर के देखो़, लोग मक़तल में हैं जा बैठे
गोरे गालों से पीछा छुड़ाया काले दिल वाले चलके आ बैठे

हो दुआ अब यही कि दवा का, मरज़ पर असर हो भी जाए
उन मरीज़ों का क्या इलाज हो जो तमरीज़ा से दिल लगा बैठे

दीन-ओ-ईमान सब छीन ले जो, भूख क्या शै है तुम क्या जानो
तुमसे खाने को ही तो मांगा था तूने धोखा दिया सो खा बैठे

दिल-ओ-दिमाग़ पर हुकूमत है करता, पेट कहने को ही मातहत है
घर में चूल्हा जलाने की ख़ातिर लोग लहू क्या घर ही जला बैठे

हर जगह बेबसी का है आलम हर तरफ़ है यही शोर बरपा
क्या करने चले थे जब चले थे, आज पहुंचे यहां कर क्या बैठे

शकल में और अस्ल में और हैं, मुंह में कुछ है बगल में कुछ है
गोल खम्भों के अपने गोल घर में हम किस किस को हैं बिठा बैठे

उसकी ज़ुल्फ़ों का क़ुसूर है सब, दराज़ इतनी अगर ये बहर है
और ख़म इस कदर कि ग़ज़ल का रदीफ़ उठे तो क़ाफ़िया बैठे

Rush

मैं बोल रहा हूं इसलिए चुप होकर
तुम अपनी बारी के इंतज़ार में हो
तुमने अपने आपको बोलते सुना है कभी?
तुमने किसकी सुनी है कि सुनोगे अपनी?
तुम्हारी धड़कनें तुम्हारे कान को तरसती हैं
तुम सुनते नहीं उनके रक्तचाप होने तक
तुम्हारी लाइफ़ है, ये तुम्हारा स्टाइल है
लाइफ़स्टाइल डिज़ीज़ होने तक

घर से दफ़्तर के बीच बांई तरफ़ पेड़ है एक
उस पर इस बार भी नीले फूल खिले हैं
रेडलाइट पर भीख मांगने वाली लड़की
आज नहीं थी, आगे भी नहीं आएगी
तुम जब नए बहाने की उधेड़बुन में थे
लाइट कब ग्रीन हुई ये भी तुम्हें याद नहीं
तुम्हारे दफ़्तर पहुँचने तक
एक दफ़्तर होता है तुम्हारे भीतर,
जहां तुम व्यस्त रहते हो या व्यस्त दिखते हो

लाॅन्ग ड्राइव का क़िस्सा तुम्हें याद है
ड्राइव का कोई हिस्सा तुम्हें याद नहीं
रास्ता देखता रहता है तुम्हारा रस्ता
तुम बढ़े जाते हो मंज़िल की तरफ़
और तुम्हें सब खेत, नहर
रिअर व्यू मिरर से देखते हैं
क्या कभी तुमने उन्हें देखते हुए देखा है?
जिस झील के फ़ोटो फ़ेसबुक पर अपलोड किए
उस झील के शांत पानी पर
कितने चेहरे नावों की तरह तैरते हैं
उन सब ने तुम्हें देखते हुए देखा है
कैसे तुमने हैलो तक नहीं कहा उनको

आॅफिस की पार्टी के लिए अपने बग़लों पर
डनहिल डिज़ायर छिड़क कर जब निकले
कार का शीशा चढ़ा रखा था
परफ़्यूम गर उड़े गाड़ी में रहे
रजनीगंधा रोती रही गली के कोने में
उसकी नाकामी पर चाँद हंसता रहा।
तुम्हें याद है पिछली बार सांस कब ली थी
लिफ़्ट ख़राब थी दफ़्तर की उस दिन
या फिर घूमने गए थे जब हिल स्टेशन
सांस है इसलिए ही ज़िन्दा हो
तुम्हें सब याद है ज़िन्दगी के सिवा

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Pursuit of Happiness

Her absence is the void
The feeling of her absence fills
From corner to corner
Leaving no space
for any feeling else
Her absense is a presence
overwhelming
The absence of joy
isn’t sorrow
Melancholy is
Quest of happiness
The quest born
of the feeling of absence,
not absence itself
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In pursuit of happiness
Pursuit is the content
happiness just intent
I am loneliness
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उसके ना होने का एहसास
दिन-रात, शाम-ओ-सहर
ज़हन में रहता है
उसी का घर है
उसके ना होने का एहसास
अगर ना हो
तो बहुत जगह है
हसरतों को कुछ होने के लिए
बहुत ज़मीन है
नए ख़्वाब बोने के लिए

उसके ना होने का एहसास
मुझे इतना है
कि मैं हर वक़्त
उसी की तलाश में हूं
ख़ुशी मेरे हर दुख का सबब है
मैं ख़ुशी की तलाश में हूं।
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होना या ना होना ख़याल है बस
होने ना होने का एहसास हक़ीक़त
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Presence or absence are perceptions
What’s felt is all that’s real
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Eternal

bargad

तुम्हारे हिज्र में वैसे तो ग़म-ए-बेहद हूँ
तुम जो आए हो तो आज बहुत गदगद हूँ

सराय है दुनिया जहां से आदमी का
रफ्त जो हुआ मैं हूँ, मैं ही आमद हूँ

गर्दिशें थकें तो करती हैं आराम यहाँ
सुकून के लिए अय्याम का मैं मसनद हूँ

मैं दिलदार हूँ तो अहल-ए-दिल के वास्ते
बेदिली हो तो फिर फ़ितना-ए-आदमकद हूँ

एक डोर हूँ जिसका सिरा कोई भी नहीं
एटर्नल हूँ, सनातन हूँ, मैं तो अनहद हूँ

आवाज़-ए-हक़ को आहनी हुदूद से क्या
बाड़ के बस में नहीं हूं मैं तो बरगद हूँ।

Sahar

यूं हुआ कि फिर वो बात उम्र भर ना हुई।
हुई जो रात तो फिर रात की सहर ना हुई।

तुम्हारे करम के क़िस्से हैं हर तरफ़ फैले,
ये और बात है हम पर कभी मेहर ना हुई।

हुआ यूं नीमनूर अपनी तमन्ना का चिराग़,
अंधेरी रात में भी ख़्वाहिश-ए-क़मर ना हुई।

मरहम-ए-वक़्त वहम है देखो वक़्त के साथ,
हमारी हालत तो बदतर हुई, बेहतर ना हुई।

तुमसे मिलकर जैसे बेसाख़्ता आई थी ख़ुशी,
फिर और किसी से कभी मिलकर ना हुई।

तुमने छोड़ा तो घटाओं ने बहुत साथ दिया,
ऐसी बरसात किसी से भी बिछड़कर ना हुई।

हमारी दरकिनार हो गईं दुआएं सब
तुम्हारी बद्दुआ ही थी जो बेअसर ना हुई।

तेरी नज़र कभी शबनम तो कभी शोला है
नसीब मेरे ग़ज़ल को सही बहर ना हुई।

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