धौरे मरदे

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धौर मर्दे, धौर मर्देनतन, धौरे मरदे
मनबढ़ुआ के बढ़ गइलै मन धौरे मरदे

भोली सूरत धोखा खाने को काफी है
उसके ऊपर ये भोलापन धौरे मरदे

दंगल है इस बात पे जंगल राज बहुत है
मंगल-मंगल कब था ये वन धौरे मरदे

दफा करो बेवफा भला क्या रफू करेंगे
सदियों से सदचाक है दामन धौरे मरदे

वैस्हैं जिनगी नाच नचावै है दिन रात
और सचमुच में टेढ़ा आंगन धौरे मरदे

भूखे-नंगे बच्चों से उम्मीद बहुत है
उच्च विचार और सादा जीवन धौरे मरदे

अच्छे दिन जब आएंगे तब देखेंगे
दिवास्वप्न में दीवानापन धौरे मरदे

अब हमको सब हरा हरा ही लौके है
आंखें देकर भागा सावन धौरे मरदे

 

Mera Desh Badal Raha Hai

किस सिम्त ये ना पूछो, बूझो कि चल रहा है
बस आगे बढ़ रहा है, मेरा देश बदल रहा है

मुझे जख्म देने वाले, तुझे मेरी सब दुआएं
रिस-रिस के उससे एक-एक अरमां निकल रहा है

उस दल को तुमने पिछले दंगल में जिताया था
अब वो दल तुम्हारी छाती पर मूंग दल रहा है

सीने में इक ख़ला है, सीने में ही पला है
सीने में जो जलन है, सीना ही जल रहा है

हुज्जत यहां है किसकी हुज्जत में तुम पड़ो ना
इज्जत बची तो समझो अच्छा ही चल रहा है

मंजिल का हौसला था, तूने पांव काट डाले
उसके हाथ ही बचे हैं, सो हाथ मल रहा है

गंगा निकल गई है, हाथों से हिमालय के
दुष्यंत, तुम्हारे पीर का पर्वत पिघल रहा है