The Common, The Aam

किसी के साथ इनका हाथ। किसी के हाथ इनका साथ। किसी की पार्टी की हैं शान, किसी की पार्टी का हैं नाम। जिनका चिन्ह है अरविंद उनके पुराने हो गए राम, जिसको देखो वही पुकारे जय श्री आम। जय श्री आम। आम चरित मानस की रचना तो कोई नया तुलसी करे पर चरित-रहित राजनीति के मानस का राजा आम है। आज खास नहीं, पेश है एक आम पेशकश।

    आम का नाम बदनाम ना करो

खाने वाले ख़ास हैं, आम है बदनाम है।
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

घर में कोई काट रहा, लोगों में बाँट रहा,
हाथों से दबा दबा पिलपिले को छाँट रहा,
जिसके भी हाथ लगा चूस लिया छोड़ दिया,
रेशे में रस जो बचा घूस सा निचोड़ लिया,
रह गई गुठली सो उसका भी दाम है,
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

हाथों में आम है या आमों का हाथ है,
गिनती ही बतावेगी कौन किसके साथ है,
हरे-हरे आम जाने किसके साथ जाएँगे,
सफ़ेदा ये सोच रहा हम किसको भाएँगे,
केसरिया उलझन में आम नया राम है
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

सीजन शुरू हुआ तो बौराए ख़ूब थे,
आम के किसानों के हौसले मंसूब थे,
मंज़र यूँ बदला कि मंजर नहीं बचे,
फूल कर कुप्पा थे फूल भर नहीं बचे,
मौसम जो करवट ले, किस्सा तमाम है,
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

दागी हुए आमों का कौन ख़रीदार है,
फिर भी ये राजा हैं, इनकी सरकार है,
चुस गए चौसाजी युवा हृदय सम्राट हैं,
कहने को लंगड़े हैं, भागते फर्राट हैं,
तोतापुरी सोच में है, चोंच का ग़ुलाम है।
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

सियासत की फाँस में अल्फांसो फँस गया,
दिल्ली की दलदल में किशनभोग धँस गया,
दशहरी* रोती रही सदर बाज़ार में,
व्यस्त रहा संसद आम के व्यापार में
सिंदूरी जरूर है पर सुबह है या शाम है?
आम आदमी है या आदमी ही आम है।

——————————————————
*आम पुल्लिंग है, आदमी की तरह। पर दशहरी यहाँ स्त्रीलिंग हो गया/गई है, बाजार के हवाले से। आम भी वैसे ही लचीला है, आप जैसा समझें।

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4 Comments

  1. सर, बहुत अच्छा लगा पढ़कर। ऐसी तुकबंदी पहली बार पढ़ने को मिली।
    गोपाल कांडा और पॉन्टी चढ्ढा पर लिखे लेख भी पढ़े थे। जब भी कुछ बड़ा होता है जो खासकर तो आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहता है।

    Reply

  2. हरा, पीला, लाल हर रंग में मौजूद है
    रंग पर न जा, बेरंग है तब भी वजूद है
    आगे आके देख, ये उस जमात में हैं अब-
    बाग मेरा महफूज नहीं, आड़ी महदूद है।

    ये जानते हैं राजनीति, रसभरा आम है।
    आम आदमी है या आदमी ही आम है।

    Reply

  3. 1.ये जानते हैं रसभरा आम है
    आम आदमी है या आदमी ही आम है
    कौन खट्टा कौन मीठा आम है

    2.जिनका नाम अरविंद वे राम के बजाए आम के साथ चले गए, शायद इसलिए क्योंकि कमल के ईश भी कमलपंथियों के कभी बगलगीर नहीं हुए।

    3.वैसे भाई साहब आपकी रचना में खास अर्थ के लिए आम का विशद वर्णन किया गया है, इससे मुझे मुनव्वर राना का एक शेर याद आ रहा है, हालांकि उसका इस रचना के खास अर्थ से कोई ताल्लुक नहीं है। लेकिन आम से ताल्लुक है- इंसान के हाथों की बनाई नहीं खाते, हम आम के मौसम में मिठाई नहीं खाते

    Reply

  4. ये आम पेशकश बहुत खास है
    इसका हमें अहसास है
    लेकिन मलिहाबादी का जिक्र न होने से
    लखनऊ वाले निराश हैं

    Reply

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