Fear, Oh Dear!

मैं तो बस आप ही से डरता हूँ. میں تو بس آپ ہی سے ڈرتا ہوں
मैं कहाँ कब किसी से डरता हूँ. میں کہاں کب کسی سے ڈرتا ہوں

मेरी दुनिया है रोशनाई में, میری دنیا ہے روشنائی میں
इसलिए रौशनी से डरता हूँ. اسلئے روشنی سے ڈرتا ہوں

बहर-ए-आंसू हूँ बदौलत तेरी, بحرآنسو ہوں بدولت تیری
तेरी दरियादिली से डरता हूँ. تیری دریادلی سے ڈرتا ہوں

जब तेरा अक्स याद आता है, جب تیرا اقس یاد آتا ہے
मैं बहुत सादगी से डरता हूँ. میں بہت سادگی سے ڈرتا ہوں

रंज से इस कदर याराना हुआ, رنج سے اس کدر یارانہ ہوا
मिले तो अब खुशी से डरता हूँ. ملے تو اب خوشی سے ڈرتا ہوں

मौत से डर नहीं ज़रा भी मुझे, موت سے ڈر نہیں ذرا بھی مجھے
हाँ, इस जिंदगी से डरता हूँ. ہاں، اس زندگی سے ڈرتا ہوں

जाने पहचाने थे हाथ औ खंजर, جانے پہچانے تھے ہاتھ-او -خنجر
कहता था अजनबी से डरता हूँ! کہتا تھا اجنبی سے ڈرتا ہوں

वस्ल की बात पर ख़मोशी भली, وصل کی بات پر خموشی بھلی
हाँ से भी, और नहीं से डरता हूँ! ہاں سے بھی اور نہیں سے ڈرتا ہوں

वो इक रात की गफ़लत ही थी, وو اک رات کی گفلت ہی تھی
मैं क्यूँ फिर चांदनी से डरता हूँ! میں کیوں پھر چاندنی سے ڈرتا ہوں

ये क्या किया कि आसमां वाले, یہ کیہ کیا کے آسماں والے
मैं तुम्हारी ज़मीं से डरता हूँ! میں تمھاری جمیں سے ڈرتا ہوں

ग़म का बारूद छुपा सीने में, غم کا بارود چھپا سینے میں
फिर इक शोलाजबीं से डरता हूँ! پھر اک شولاجبیں سے ڈرتا ہوں

तेरे रुखसार पे एक नई गज़ल, تیرے رخسار پے ایک نی غزل
जो लिखी है उसी से डरता हूँ! جو لکھی ہے اسی سے ڈرتا ہوں

साँस गिनती की ही बची है मगर, سانس گنتی کی ہی بچی ہے مگر
घर में तेरी कमी से डरता हूँ. گھر میں تیری کمی سے ڈرتا ہوں

तुम्हारी याद के सहराओं में, تمہاری یاد کے صحراؤں میں
हर घड़ी तिश्नगी से डरता हूँ! ہر گھڑی تشنگی سے ڈرتا ہوں

दिल लगाने का शौक है तुमको, دل لگانے کا شوق ہے تمکو
और मैं दिल्लगी से डरता हूँ! اور میں دللگی سے ڈرتا ہوں

साक़िया चश्म-ए-करम कायम रख, ساقیا چشم کرم کیم رکھ
होश में भी तुम्हीं से डरता हूँ! ہوش میں بھی تمہیں سے ڈرتا ہوں

जब से सब हो गए ईमां वाले, جب سے سب ہو گے اماں والے
मैं हर एक आदमी से डरता हूँ. میں ہر ایک آدمی سے ڈرتا ہوں

——————————————————–

का किसी से कहें, काकिसि खुद ही, کا کسی سے کہیں کےککسی خود ہی
हूँ काकिसि और काकिसि से डरता हूँ! ہوں ککسی اور کاکسی سے ڈرتا ہوں

——————————————

नावेद अंजुम ने इस ग़ज़ल को दो और शेर बख्शे:

ये जो हैं अक्ल-ओ-खिर्द वाले नावेद, یہ جو ہیں عقل خرد والے نوید
उनकी तिश्नालबी से डरता हूँ. انکی تشنلابی سے ڈرتا ہوں

चारागर तूने वो खुशी दी है, چاراگر تونے وو خوشی دی ہے
अब मैं आज़ुर्दगी से डरता हूँ اب میں آزردگی سے ڈرتا ہوں

_________________________________

रोशनाई: Darkness बहर: Ocean अक्स: Countenance रंज: Sorrow सहरा: Desert तिश्नगी: Thirst ईमां: faith काकिसि: तखल्लुस | کاکسی: تخللس Pen name
| खिर्द: Samajh | तिश्नालबी: parched lips | चारागर: Doctor | आज़ुर्दगी: being unwell

Advertisements

2 Comments

Say something!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s