Cool Quotient

(Thanks to long days and no time to think in the last two days, here’s note from last year discovered yesterday. Do react!)

उठो, बाँहें चढ़ाओ,
उफनते हुए सागर के
सीने पे चढ़ जाओ
मत सोचो लहरों की दिशा
अनुकूल है या प्रतिकूल है
अपने बाजू पर भरोसा,
हस्ब-ए-मामूल है तो सब कूल है!

तेरे नख्ली ज़मीं पे ए बागबां,
जो पसीने से सिंचा इक झाड़ है
उसे गले लगा के मुस्कुरा,
चाहे फूल है या शूल है
स्वेद-सिंचित सत्य है,
ये मूल है तो सब कूल है!

एक ही जीवन है, लुट गया,
लुटा दिया,
या फिर यूं ही बिता दिया,
अगली बार बेहतर करेंगे
ये सोचना भी भूल है
पुनर्जनम झूठ है,
ये सच जो मालूम है तो सब कूल है!

कर्म का कोई अर्थ,
कोई उद्देश्य हो, हे पार्थसारथी!
अगर मा फलेषु कदाचन,
तो कर्मण्ये वाधिकारस्ते फ़िज़ूल है,
हाँ दूसरों के फल का लालच नहीं,
ये अगर उसूल है तो सब कूल है

उनकी मूरत हृदय में हो,
सो हृदय ही पत्थर बना लिया,
अब धड़कता नहीं, निर्जीव है, निर्मूल है,
परस्तिश की कसरत करता हूँ,
पत्थर को पसीना आता रहे,
यही पूजा का फूल है, तो सब कूल है!

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3 Comments

  1. उनकी मूरत हृदय में हो,
    सो हृदय ही पत्थर बना लिया,
    …………..उफ़ उफ़

    Reply

  2. उठो, बाँहें चढ़ाओ,
    उफनते हुए सागर के
    सीने पे चढ़ जाओ
    मत सोचो लहरों की दिशा
    अनुकूल है या प्रतिकूल है
    अपने बाजू पर भरोसा,
    हस्ब-ए-मामूल है तो सब कूल है!
    सही बात है। बाजुओं में दम हो तो प्रतिकूल हो जाता अनुकूल है।

    Reply

  3. ये सोचना छोड़ दो क्या अनुकूल है या क्या प्रतिकूल है,तो दुनिया में सब कूल ही कूल है

    Reply

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