Pleadings to Baba!

ये मुल्क तो ना संभला, हम खुद संभल तो लें!
और कुछ बदल ना पाए, कैबिनेट बदल तो लें!

लूट-ओ-खसोट खूब,
चेहरे पे चोट खूब,
मिलते रहे हैं फिर भी
लोगों से वोट खूब!
जो करेगा, वो भरेगा
जो डरेगा, सो मरेगा,
आम आदमी के वास्ते
लाए थे हम नरेगा!
उस आदमी का नाला,
निकला है यूं दिवाला,
हम क्या दिखाएंगे अब
ये मुंह ही हुआ काला!

नई योजनाओं का पाउडर इस मुंह पे मल तो लें,
और कुछ बदल ना पाए, कैबिनेट बदल तो लें!

बाबा हमें बचाओ,
तुम मिनिस्टर बन जाओ,
भोले ही रहोगे क्या,
थोड़े सिनिस्टर बन जाओ!
अवधि के मध्य में है,
हमरी दूसरी ये नैया,
ये कह रही हैं मैया,
कि तुम हो अब खेवैया!
राजग जगा हुआ है,
तबसे लगा हुआ है,
घटक दलों का क्या है,
कौन किसका सगा है!

युवाओं पे असर हो,
विपक्ष को भी डर हो,
४0 पार कर के भी,
तुम यूथ के लीडर हो!

रस्ता अगर ना निकले, कुछ अरमां निकल तो लें!
और कुछ बदल ना पाए, कैबिनेट बदल तो लें!

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2 Comments

  1. बदलाव का दौर है सर। मौसम बदल रहा है। कैबिनेट बदलेगी। वैसे राहुल जी का मंत्री बनने से ज्यादा जरूरी दूल्हा बनना है। बेटे को मंत्री तो क्या प्रधानमंत्री बना सकती हैं मम्मी पर दूल्हा नहीं।

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