Bazm-e-rang Boomerang

 

 

 

 

 

 

 

जब तलक बज़्म में रौनक आई,
तमाशा बन गए तमाशाई!!

उगा जो शहर तो खामोश है झील,
लवासा तुम हो, मैं धराशाई!

जो अंजलि से काई उछाला करते थे,
उनके दामन पे पड़ गया काई!

उनकी टोपी लगाए फिरते थे,
जिनकी टोपी पर ही बन आई!

जो गाँधी थे आश्रम गए वापस,
ना रास आई उनको रुसवाई!

ना लगे आग, दाग तो लगेगा ही,
साफ़ दामन की हो पज़ीराई,

नित नए राज़ खुलते हैं यहाँ,
चौपट राजा का राज है भाई!

तब्सरा करते रहे आलिम साहिब,
सामईन लेते रहे जम्हाई!

इधर कांग्रेस है, उधर एनडीए,
यहाँ कुआं तो उस तरफ खाई!

 

Advertisements

2 Comments

  1. जो गाँधी थे आश्रम गए वापस,
    ना रास आई उनको रुसवाई!

    शानदार है भाई साहब

    और करते भी क्या बेचारे
    उम्र भर की कमाई केजरीवाल ने गंवाई

    Reply

  2. Sahaj lagti panktiyaan..Ghaao Kare Gambheer …behas prabhavi..haasy ka ehsaas Chutila Vyangya karta hai..Sambhav hai Ustaadon ko Bahar aur Wazan Ka Tota lage..Lekin Ek Bhaarty Ki Chinta Aur Uskaa Fitri Kataksh Yahaan Nisandeh Mukhar Hota Hai.Ye Kavita Lokpriy Aur Janvadi Kaviyon Ke Chutkule Aur Vaichaarik Bhadaas Se par Patthar rakh deti hai..

    Reply

Say something!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s