Saifeena. The Ghazal.

जिए जाना है, ये जीना नहीं है,
अगर जीने का करीना नहीं है!

कहते हैं शाहिद हैं जो हादसे के,
जो डूबा है मेरा सफीना नहीं है!

वही लड़खड़ाए हैं महफ़िल में तेरी,
कि जिनके हाथों में मीना नहीं है!

मिट्टी से मेरी जड़ें ना उखाड़ो,
क्या इसमें मेरा पसीना नहीं है!

मेरे टूटे दिल को यूं ना कुरेदो,
इसमें अब कोई खजीना नहीं है!

उम्र-ए-दराज़ भी चार ही दिन की है,
दो कोतां मिले तो कमीना नहीं है!

सैफ-ओ-गर्दन हुए आमने-सामने,
है सब को पता किसको जीना नहीं है!

मुहब्बत वो कहते हैं नाबीना है,
जो करता है वो तो नाबीना नहीं है!

______________________________________

करीना : way to do something | मीना : tippler’s favourite | शाहिद: witness | सफीना: boat | खजीना: treasure | दराज़: long |कोतां: short | सैफ: sword | नाबीना: blind

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8 Comments

  1. अच्छी गजल है। बेहतर हो कि ऐसे अरबी फारसी शब्द जो प्रचलन में नहीं हैं या कम हैं उनके अर्थ भी लिख दिया करें-मसलन नाबीना,

    Reply

      1. शुक्रिया, पर लाइक वाले खाने में कुछ समझ नहीं आ रहा। स्क्रीन से बाहर हो जा रहा है।

  2. Good, spontaneous couplets. I like them. My favourite: उम्र-ए-दराज़ भी चार ही दिन की है,
    दो कोतां मिले तो कमीना नहीं है!

    Reply

  3. उम्र-ए-दराज़ भी चार ही दिन की है ………………..
    🙂 🙂

    ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है समन्दरों ही के लहजे में बात करता है

    Reply

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