उन्माद का शंखनाद

आओ. भीड़ बनो, भिड़ जाओ!
खून है अपना, बहाओ,
अपनों का बहाओ, गैरों का बहाओ,
औरों की उमड़ती भावनाओं में
बह जाओ. आओ.

आओ कि धर्म पर संकट है,
धर्मसंकट है या धर्म संकट है.
आओ कि देश खतरे में है
बढ़ती महंगाई है, एफडीआई है,
काली कमाई है,
अपने अपने मुद्दे पसंद करो,
फिर दुकानें बंद करो ,
रास्ता रोको, एम्बुलेंस के टायर जलाओ,
पुतले जलाओ, घरों को आग लगाओ,
किसी कमज़ोर पर हाथ आजमाओ.
आओ. भीड़ बनो. भिड़ जाओ.

राम का नाम है,
हुरमत-ए-इस्लाम है,
अंतिम रात्रिभोज में
जीसस का जाम है,
सब हलाल है, क्या हराम है,
भड़काऊ भाषण है,
पंगु प्रशासन है,
अक्ल पर पानी फिरा है,
शक्ल को तो सुलगाओ,
जो नहीं भड़के हैं,
उनकी भावनाएं भड़काओ,
आओ. भीड़ बनो. भिड़ जाओ.

अलग राज्य के लिए,
या अलग राज्य के खिलाफ,
नहर के पानी के लिए,
या सूखे के चलते आत्महत्या पर
सांप्रदायिक तत्वों के खिलाफ
किसी को आत्मदाह के लिए उकसाओ
या आत्मदाह के विरोध में आ जाओ
टीवी पर बहस कराओ,
उसकी विधवा को चेक थमाओ
फोटो खिंचवाओ.
आओ. भीड़ बनो. भिड़ जाओ.

प्रश्न मत करो,
उत्तर की प्रतीक्षा भी नहीं,
मन की सुनो,
मानस को मारो
मूंछ है तो सब कुछ है,
पूंछ को छिपाए रहो
जानवर थे हम,
जान लो,
जान लो किसी की भी, हड्डियां चबाओ,
इस शहर को जंगल बनाओ
आओ. भेड़िए बनो. भिड़ जाओ.

Advertisements

One Comment

  1. इसकी एक मिसाल है
    जिनकी मौत पर पूरा बिहार जल उठा
    जनाब झा जी सकुशल मिले दिल्ली मे

    Reply

Say something!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s