COT BEHIND

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People run away with cots from the venue of Rahul Gandhi’s first Khaat Sabha in an Eastern Uttar Pradesh town.@ManmohanRaiET

बात छोटी थी कितनी बड़ी हो गई
अभी बिछाई अभी खटिया खड़ी हो गई

इतना लंबा,सटीक,सुथरा भाषण दिया
मीडिया खाट पे अटकी घड़ी हो गई

गली गली शोर है प्रशांत किशोर है
मेरी सभा ना हुई फुलझड़ी हो गई

हम तो संसद में झपकियां लेते रहे
खाट मिली तो नींद तड़ी हो गई

इज्जत का फलूदा सुना था बहुत
अपने इज्जत की तो रेवड़ी हो गई

बात छोटी थी और कितनी बड़ी हो गई
अभी बिछाई अभी खटिया खड़ी हो गई

धौरे मरदे

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धौर मर्दे, धौर मर्देनतन, धौरे मरदे
मनबढ़ुआ के बढ़ गइलै मन धौरे मरदे

भोली सूरत धोखा खाने को काफी है
उसके ऊपर ये भोलापन धौरे मरदे

दंगल है इस बात पे जंगल राज बहुत है
मंगल-मंगल कब था ये वन धौरे मरदे

दफा करो बेवफा भला क्या रफू करेंगे
सदियों से सदचाक है दामन धौरे मरदे

वैस्हैं जिनगी नाच नचावै है दिन रात
और सचमुच में टेढ़ा आंगन धौरे मरदे

भूखे-नंगे बच्चों से उम्मीद बहुत है
उच्च विचार और सादा जीवन धौरे मरदे

अच्छे दिन जब आएंगे तब देखेंगे
दिवास्वप्न में दीवानापन धौरे मरदे

अब हमको सब हरा हरा ही लौके है
आंखें देकर भागा सावन धौरे मरदे

 

Mera Desh Badal Raha Hai

किस सिम्त ये ना पूछो, बूझो कि चल रहा है
बस आगे बढ़ रहा है, मेरा देश बदल रहा है

मुझे जख्म देने वाले, तुझे मेरी सब दुआएं
रिस-रिस के उससे एक-एक अरमां निकल रहा है

उस दल को तुमने पिछले दंगल में जिताया था
अब वो दल तुम्हारी छाती पर मूंग दल रहा है

सीने में इक ख़ला है, सीने में ही पला है
सीने में जो जलन है, सीना ही जल रहा है

हुज्जत यहां है किसकी हुज्जत में तुम पड़ो ना
इज्जत बची तो समझो अच्छा ही चल रहा है

मंजिल का हौसला था, तूने पांव काट डाले
उसके हाथ ही बचे हैं, सो हाथ मल रहा है

गंगा निकल गई है, हाथों से हिमालय के
दुष्यंत, तुम्हारे पीर का पर्वत पिघल रहा है

Jashn-e-Aazadi

गैरत गई तो क्या हुआ, टशन चल रहा है
भई अपनी आज़ादी का जशन चल रहा है।

सरहद पे रहने वालो, सर-ए-हद तो जान लो
144 के तहत खूब हुब्ब-ए-वतन चल रहा है।

वतन पे मरने वालों का बाकी निशां ये है
पेंशन के लिए धरना प्रदर्शन चल रहा है।

सच बोलने पे टंगना कलजुग की रवायत है
अभी तो दौर-ए-दार-ओ-रसन चल रहा है।

झंकार बीट आ जाए तो फिर हिट है इबादत
डीजी की धुन पे नात-ओ-भजन चल रहा है।

सोशल नहीं, अंजुमन-ए-तहसीन-ए-बाहमी है
यां तो तुम हसीन और हम हसन चल रहा है।

Che Ganwara!

आस के बंधन टूट गए हैं
बालम मो से रूठ गए हैं।

भगवा तन और मन अंगरेज
कौन सो रंग दियो रंगरेज
बीतो बरस अब, कछु नहीं सरस अब
नर के इंद्र भी दिखैं अबस अब
जड़-चेतन में सगरे जगत में
का देखौ तुम अपने भगत में
काहै चेहरा मोड़ लिए हौ
हमसे रिश्ता तोड़ लिए हौ।

कितनी गाथा हमने बांची
आधी झूठी आधी सांची
तुम को पालन हार बताके
जीवन का सब सार बताके
कहो विकास कहां है किधर है
वही तमाशा उधर इधर है
कागद कारे कर कर हारे
तुम ही हमको भूले बिसारे।

रुसवाई का कारण का है
जगहंसाई बेकारण का है
हमरी अरज तुम्हरी भी होती
हमरी गरज हमरी ही क्यों है
भागत-भगत कहां आ पहुंचे
तुम्हरे जगत में हम ना पहुंचे
सपन सलोना कोना कोना
हमरे माथे लिखा था रोना

आस के बंधन टूट गए हैं
बालम मो से रूठ गए हैं।

Happy New Year

साल बदला है तो आपको हो साल मुबारक,
हाल बदला नहीं वैसे तो, बहरहाल मुबारक।

बीता जो साल आपको सालेगा सालों तक,
आया जो साल उसकी नई चाल मुबारक।

घर वापसी पे इतना क्यूं हंगामा है बरपा,
हम सब हैं भागवत के ही तो माल मुबारक।

हमें मालूम है अच्छे दिन की हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल मुबारक।

मोदी जी को मिल गई बागडोर मुल्क की,
अपने ही बन गए जी का जंजाल मुबारक।

छह महीने में ही छक्के छूटे हैं आप के,
छक्का ना लगा दे ये केजरीवाल मुबारक।

वादों की लड़ी बन रही है पार्टी दफ्तर में,
दिल्ली के गंजे पाएंगे अब बाल मुबारक।

सत्ता के गलियारों में सफेदी की चमक है,
स्थाई तो नहीं है पर फिलहाल, मुबारक।

स्वच्छ भारत मिशन ब्रॉट टू यू बाय शिखर,
गुटखे की पीक से होगा सब लाल मुबारक।

पीके के पोस्टरों पर पिल पड़े हैं यूथिए,
आमिर को नए साल में बवाल मुबारक।

हौसले आए हिनहिनाए औ चुपचाप चल दिए,
जब गधों के हाथ लग गया घुड़साल, मुबारक।

समानता उपलब्धता पर इस हद तक है निर्भर,
है घर की मुर्गियों को भी अब दाल मुबारक।

रूपए और डॉलर में क्यों बनती नहीं कभी,
हमको भी हो करेंसी में उछाल मुबारक।

जो सिंगल हैं उन्हें डबल का खयाल मुबारक
जो डबल हैं उन सब को शब-ए-विसाल मुबारक।

रहने को तो हम साथ ही रहते थे, रहेंगे,
दरकार है हर पंछी को इक डाल मुबारक।
(पिछले साल की गजल में कुछ शेर बदले हैं। ज्याद कुछ बदला ही कहां, बस आहट सी आई)

Togadia Garment Stores

Miss Lekhi skirts it, but khaaki chaddi shows,
She says, these days, out of proportion, everything blouse,

Modi says sari, it’s just a petty quote,
This is my brief, focus on the vote,

In me, not Giriraj, all the powers you will vest,
I am the one with certified 56″ chest,

I sew up the sleeve, up which is that old trick,
Get me some thread, tear the social fabric,

Press the button, zip up, let the wave not relent,
Shirt laga lo, we will form the next garment.

‘साहेब’ दूल्हा बने हैं, चलो स्वागत करें

‘साहेब’ दूल्हा बने हैं, चलो स्वागत करें
पर दिल कहता है कि चल बगावत करें

घर घर है हर हर, कहते हैं कि लहर है

पर जरूरी है क्या हम इबादत करें
कभी भूले भटके तुम हमसे मिलो
क्यूँ हम ही तेरे घर के जियारत करें

एक अरसा हुआ, उनको देखे हुए
ख्वाब में ही सही, उनको सूरत करें

हमपे नजरे करम वो करें ना करें
हमरे दिल ही पे कोई इनायत करें

किसने कहा था ‘आप’ मुहब्बत करें
कर ही लिया तो क्या शिकायत करें

तुमसे ना होगा मेरी जान, रहने दो

बहुत हुआ गुणगान बखान, रहने दो
फलां मॉडल, फलां प्लान, रहने दो!

जन्नत के बदले जमीर का सौदा है
जन्नत के साजो सामान, रहने दो

इन्तखाब में इंतकाम की बात ही क्यूँ
क्या सम्मान, क्या अपमान, रहने दो

दिल काला तो चिट्टी दाढ़ी झूठी है
क्या बाँचो गीता, कुरआन, रहने दो

सपने बेचो, डर बेचो, और क्या बेचो
तुम चाहो बेचो ईमान, रहने दो

भाई भाई के बीच में खाई खोद रहे
रहनुमाई ऐ भाई जान, रहने दो

मिट्टी का है घर अपना और तिस पर
बारिश के भी हैं इमकान, रहने दो

है जमीन पर कब्जा तो तुम ही रखो,
हमरे हिस्से का असमान, रहने दो

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, ऐ भाई
निरे उल्लू हैं, पर, इंसान रहने दो!

जान के लाले पड़े इश्क के चक्कर में
मत पड़ो ऐ लाले दी जान, रहने दो

कानों देखी, आँखों सुनी

आदमी चाह ले तो काम बड़ा कोई नहीं,
जर्फ़ जिंदा हो तो फिर जाम बड़ा कोई नहीं,
बस के इंसान को इंसान होना मुश्किल है,
बढ़ के इस से यहाँ इनाम बड़ा कोई नहीं!

हमको माजी के दरीचे में खड़ा रहने दो,
और फर्दा पर जो पर्दा है पड़ा रहने दो,
तुम्हारे तीर मेरे बदन पे बहुत फबते हैं,
ये जवाहर मेरे सीने पे जड़ा रहने दो!

हाथ है, मसलते हैं, सर है तो धुनते हैं,
गुण अवगुण सभी मन में ही गुनते हैं,
जो कभी लिहाफ-ए-एहसास में गांठें आएं,
अपनी माजी की रुई आप ही हम धुनते हैं!

ख्वाब तो ख्वाब हकीकत भी हम बुनते हैं,
फूल हो जाते हैं कांटे भी अगर चुनते हैं,
देख लेते हैं सब कानों से ही नाबीना,
और जो बहरे हैं आँखों से सब सुनते हैं!